एक खूबसूरत सी तस्वीर, फोन पर मीठी आवाज और शादी पक्की होने का भरोसा... बस इसी जाल में फंसकर कई कुंवारे लड़के अपनी मेहनत की कमाई गंवा बैठे. उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि जिस लड़की की खूबसूरती पर वे दिल हार बैठे हैं, वह असल में कोई इंसान नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई तस्वीर थी.
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कानपुर पुलिस ने एक ऐसे ही शातिर गैंग का भंडाफोड़ किया है, जो नकली दुल्हनों के सहारे कुंवारों से लाखों रुपये ऐंठ रहा था. ये गिरोह एआई टूल की मदद से तस्वीरें बनाकर कुंवारे लड़कों को फंसाया करता था.
कैसे चलता था ठगी का पूरा खेल?
पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह 'परफेक्ट रिश्ता', 'शादी मैच' और 'शादी मैच इंडिया' जैसी नकली मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स और कॉल सेंटर चला रहा था. गैंग सबसे पहले फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उन लड़कों का डेटा जुटाता था जो शादी के लिए प्रोफाइल ढूंढ रहे थे.
इसके बाद कॉल सेंटर में काम करने वाली लड़कियां (टेलीकॉलर) मैरिज काउंसलर बनकर इन लड़कों से संपर्क करती थीं. लड़कों को फंसाने के लिए इंटरनेट से लड़कियों की साधारण तस्वीरें डाउनलोड की जाती थीं. फिर AI और डिजिटल एडिटिंग टूल्स की मदद से उन्हें बेहद आकर्षक और खूबसूरत प्रोफाइल में बदल दिया जाता था.
अलग-अलग फीस के नाम पर वसूली
एक बार जब लड़का तस्वीर देखकर तैयार हो जाता, तो ठगी का सिलसिला शुरू होता था. पहले रजिस्ट्रेशन फीस मांगी जाती, फिर प्रोफाइल एक्टिवेट करने का चार्ज लिया जाता. इसके बाद रिश्ता पक्का कराने और लड़की से बात या मुलाकात कराने के नाम पर धीरे-धीरे करके लाखों रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए जाते थे.
4 लाख गंवाने के बाद खुला राज
इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब एक पीड़ित युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. युवक ने बताया कि शादी की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराने के बाद उससे अलग-अलग चार्ज के नाम पर करीब 4 लाख रुपये ठग लिए गए, लेकिन उसे कोई असली रिश्ता नहीं मिला.
पुलिस की छापेमारी और बड़ा खुलासा
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के निर्देश पर आईपीएस अंजलि विश्वकर्मा के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई. पुलिस ने जाल बिछाकर तीन अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की.
गैंग एक साल से एक्टिव था और इन्होंने हजारों लोगों को अपना शिकार बनाया, लेकिन आज तक किसी की शादी नहीं कराई. गैंग ने बाकायदा लड़कियां काम पर रखी थीं, जो लड़कों को झांसा देती थीं कि उनका रिश्ता पक्का हो गया है. - घुवीर लाल, पुलिस कमिश्नर
कानूनी दांवपेंच का भी रखते थे ध्यान
पुलिस ने इस मामले में रंजीत नाम के एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अमित कुमार, जागृति और एक अन्य आरोपी अभी फरार हैं. हैरान करने वाली बात ये है कि फरार आरोपी अमित कुमार इस गैंग को लीगल सलाह देता था.
जब भी कोई पीड़ित ठगी की शिकायत दर्ज कराता, तो अमित कोर्ट-कचहरी के मामलों में गैंग को बचाने का काम करता था. इस गैंग ने छत्तीसगढ़ की एक शादी संस्था 'परफेक्ट' की फ्रेंचाइजी भी ले रखी थी ताकि लोगों को शक न हो.
छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से दर्जनों मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड, रजिस्टर, क्यूआर कोड, कंप्यूटर सिस्टम और भारी मात्रा में डिजिटल रिकॉर्ड मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है.
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