Physics Wallah Sealed: राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए खौफनाक अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है. इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो चुकी है. इस हादसे के दौरान अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदते और तारों के सहारे लटकते युवाओं की तस्वीरों ने शासन से लेकर प्रशासन तक में खलबली मचा दी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त नाराजगी और हाई-लेवल संज्ञान के बाद अब यूपी का प्रशासनिक अमला पूरी तरह एक्टिव मोड में आ चुका है. इसी कड़ी में कानपुर प्रशासन ने देर शाम शहर के सबसे बड़े कोचिंग हब 'काकादेव' में अब तक का सबसे बड़ा सर्च और सीलिंग ऑपरेशन चलाया है. इस विशेष अभियान के तहत देश के नामी कोचिंग सेंटर फिजिक्स वाला (Physics Wallah) समेत 22 नामचीन कोचिंग संस्थानों को मौके पर ही सील कर दिया गया है.
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काकादेव में केडीए का महा-अभियान
लखनऊ हादसे से सबक लेते हुए कानपुर विकास प्राधिकरण यानी केडीए और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीमों ने काकादेव इलाके में निरीक्षण शुरू किया. जांच के दौरान जैसे ही बिल्डिंग बायलॉज और सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं. अधिकारियों ने तत्काल एक्शन लिया. पहले चरण में इन 22 दोषी संस्थानों से छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और फिर उनके मुख्य द्वारों को बकायदा सील कर दिया गया. 'फिजिक्स वाला' जैसे बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड पर हुई इस कार्रवाई के बाद पूरे शहर के कोचिंग संचालकों और कमर्शियल बिल्डिंग मालिकों में हड़कंप मच गया है.
क्यों सील किए गए कोचिंग संस्थान
केडीए अधिकारियों के मुताबिक, इन संस्थानों को सील करने के पीछे दो सबसे बड़े और गंभीर कारण सामने आए हैं.
बिल्डिंग रेगुलेशन मानक: डेवलपमेंट अथॉरिटी के नियमों को ताक पर रखकर बिना वैध नक्शे, संकरी सीढ़ियों और बिना बेसमेंट/पार्किंग क्लीयरेंस के इन इमारतों में हजारों बच्चों को ठंसा जा रहा था. सबसे गंभीर बात यह कि किसी भी तीन-चार मंजिला इमारत में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की व्यवस्था नहीं थी.
फायर सेफ्टी (अग्निशमन) मानक: आग लगने की स्थिति में बचाव के लिए जरूरी वाटर स्प्रिंकल्स, फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) और अलार्म सिस्टम या तो गायब थे या सिर्फ दिखावे के लिए खराब हालत में लटके हुए थे.
केडीए के जोनल अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान का सिर्फ पहला चरण है. बाकी बचे हुए संस्थानों की भी स्क्रूटनी की जा रही है और जहां भी कमियां मिलेंगी वहां बिना किसी रियायत के सीधे बुलडोजर या सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई की जहां एक तरफ तारीफ हो रही है. वहीं दूसरी तरफ स्थानीय नागरिकों और जागरूक जनता ने केडीए और बिजली विभाग के करप्शन पर बड़े सवाल दाग दिए हैं.
स्थानीय लोगों का साफ तौर पर कहना है कि 'काकादेव में बरसों से ये मौत के कुएं बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के धड़ल्ले से चल रहे हैं. जब तक लखनऊ में 15 बच्चों की जान नहीं गई, तब तक कानपुर के अधिकारी नींद में क्यों सोए थे? क्या विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार रहता है, तभी वे जागते हैं?' नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासन नियमित रूप से हर महीने या छह महीने में इन कमर्शियल और रिहायशी इलाकों में चल रहे कोचिंग सेंटर्स का इंस्पेक्शन करता रहता तो आज नौबत यहां तक पहुंचती ही नहीं और न ही छात्रों की सुरक्षा दांव पर लगती.'
सीएम योगी खुद ग्राउंड जीरो पर
इस कार्रवाई के पीछे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख है. लखनऊ के अलीगंज में कल देर शाम खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया था. हादसे से विचलित मुख्यमंत्री ने आज के अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों को रद्द कर दिया है और वे लखनऊ में ही रहकर खुद इसकी समीक्षा बैठक ले रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के रडार पर सिर्फ लखनऊ या कानपुर नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश के उन सभी शहरों (जैसे प्रयागराज, वाराणसी, नोएडा) के कोचिंग सेंटर्स और कमर्शियल बिल्डिंग्स हैं जो रेजिडेंशियल इलाकों में अवैध रूप से बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं. आने वाले दिनों में इन सभी पर गाज गिरना तय माना जा रहा है.
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