Jhansi Crime News: उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. झांसी के मसाज पार्लर में काम करने वाली एक क्रिश्चियन लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मचा हुआ है. लड़की के आधार कार्ड से ये बात सामने आई है कि वह मणिपुर की रहने वाली थी और उसका नाम सिम्मी उर्फ टेरेसा है. आरोप है कि सिम्मी की मौत के बाद उसके लिव इन पार्टनर इजहार ने उसे मुस्लिम कब्रिस्तान में दफनाने की कोशिश भी की थी. लेकिन कब्रिस्तान कर्मचारियों की सतर्कता से मामला खुला तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.
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क्या है पूरा मामला
नवाबाद थाना क्षेत्र स्थित जीवन शाह कब्रिस्तान में गुरुवार सुबह इजहार और जोया नाम के एक युवक और युवती लोडिंग गाड़ी लेकर पहुंचे. इस दौरान दोनों ने एक दूसरे को भाई-बहन बताते हुए सिम्मी के शव को दफनाने की बात कही. लेकिन उनकी बातों पर कब्रिस्तान कर्मचारियों को शक हुआ तो उन्होंने आधार कार्ड मांगे. जांच में सामने आया कि शव मणिपुर की रहने वाली क्रिश्चियन युवती सिम्मी उर्फ टेरेसा का है. जबकि शव लाने वाले दोनों लोग मुस्लिम समुदाय से हैं. इसके बाद कब्रिस्तान प्रबंधन ने दफनाने से साफ इनकार कर दिया और पुलिस को सूचना दी गई.
मृतका के पति के बारे में क्या पता चला
मृतका की पहचान सिम्मी उर्फ टेरेसा के रूप में हुई जो मूल रूप से मणिपुर की रहने वाली थी. इस दौरान ये भी खुलसा हुआ कि सिम्मी झांसी में एक मसाज सेंटर में काम करती थी. उसका पति जॉन दिल्ली में नौकरी करता है. सूचना मिलने पर वह अपने रिश्तेदार के साथ झांसी पहुंचा और मौत को संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग की.
सहेली जोया ने सिम्मी की कौन सी आखिरी इच्छा बताई
मृतका की सहेली जोया के मुताबिक, दोनों की मुलाकात नंदनपुरा स्थित 'पल मसाज सेंटर' में हुई थी. धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती गहरी हो गई और आर्थिक तंगी के कारण सिम्मी उसके साथ रहने लगी. जोया का दावा है कि, सिम्मी पिछले कुछ दिनों से बीमार थी. उसे सिविल मेडिकल कॉलेज और निजी डॉक्टर से इलाज कराया गया. शाम करीब 6 बजे उसकी मौत हो गई. मरने से पहले सिम्मी ने मुस्लिम रीति से दफनाने की इच्छा जताई थी.जोया ने यह भी कहा कि वह शव को परिजनों के आने तक सुरक्षित रखने के लिए फ्रीजर में रखवाकर लाई थी.
प्रेमी इजहार का पक्ष
मृतका के कथित प्रेमी इजहार ने बताया कि दोनों की मुलाकात 4-5 महीने पहले मसाज पार्लर के जरिए हुई थी. सिम्मी ने खुद को अविवाहित और परेशान बताया था. उसे शराब पीने की आदत थी और वह पिछले 10 दिनों से बीमार थी. उसने इलाज कराने की कोशिश की और परिवार को सूचना दी. इजहार ने कब्रिस्तान में दफनाने के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह शव को पोस्टमार्टम प्रक्रिया के लिए लेकर जा रहा था ना कि दफनाने के लिए. हालांकि, कब्रिस्तान चौकीदार के बयान इससे अलग हैं जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है.
रिश्तेदार ने जताई हत्या की आशंका
मृतका के पति जॉन के साथ झांसी पहुंचे रिश्तेदार अमन सिंह ने पूरे मामले को बेहद संदिग्ध बताते हुए कहा कि सिम्मी की मौत के बाद उसे चर्च ले जाने के बजाय सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया.जल्दबाजी में दफनाने की तैयारी की जा रही थी. अगर समय रहते मामला न खुलता तो बिना जांच के शव दफना दिया जाता. उन्होंने मामले को संवेदनशील बताते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की.
कब्रिस्तान कमेटी की सतर्कता से खुला मामला
जीवन शाह कब्रिस्तान कमेटी के सदस्य इमरान खान ने बताया कि चौकीदार ने संदिग्ध स्थिति की सूचना दी. शव लाने वाले अपनी पहचान स्पष्ट नहीं कर पा रहे थे. कफन और दफनाने की तैयारी भी संदिग्ध थी. पूछताछ में लोग बार-बार अपनी पहचान बदल रहे थे. उन्होंने बताया कि ये लोग पहले कानपुर चुंगी कब्रिस्तान भी गए थे जहां से उन्हें लौटा दिया गया था. कमेटी की सख्ती के चलते बिना पहचान और संदिग्ध परिस्थितियों में शव को दफनाने की कोशिश को रोक दिया गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आएगा मौत का सच
फिलहाल मामले की गंभीरता को देखते हुए नवाबाद थाने की पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. संबंधित लोगों को थाने में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. मौत के कारण और घटनाक्रम की जांच की जा रही है.अब यह मामला सिर्फ एक संदिग्ध मौत नहीं बल्कि कई परतों में उलझी एक रहस्यमयी कहानी बन चुका है. दोस्ती, प्रेम संबंध, धर्म, पहचान और परिस्थितियों के उलझे तार अब पुलिस जांच के दायरे में हैं. ऐसे में अब सबकी नजर पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की जांच पर टिकी हैं जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने लाएगी.
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