उत्तर प्रदेश के बागपत में टेंट व्यापारी सोहनलाल और उनके बेटे की निर्मम हत्या ने एक पूरे परिवार के वजूद को ही मिटा दिया है. जिस घर में महज छह महीने पहले शहनाइयों की गूंज थी वहां आज सिर्फ चीखें और मातम शेष है. 100 रुपये के मामूली विवाद में टेंट व्यापारी सोहनलाल अग्रवाल और उनके बेटे विकास की हत्या वरुण लोहारी ने की थी. इस घटना ने विकास की पत्नी नेहा की जिंदगी में वो अंधेरा ला दिया है जिसकी उसने कभी सपने में भी कल्पना नहीं की थी. अनाथ नेहा जिसके लिए विकास ही उसकी पूरी दुनिया था अब अपने पति और ससुर दोनों को खो चुकी है. सबसे ज्यादा दर्दनाक बात यह है कि नेहा की कोख में 3 महीने का बच्चा पल रहा है जो दुनिया में आने से पहले ही अनाथ हो गया.
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6 महीने पहले हुई थी शादी
विकास और नेहा की शादी महज 6 महीने पहले हुई थी. अनाथ नेहा की शादी उसकी बहनों ने बड़े अरमानों के साथ की थी. नेहा ने सोचा था कि ससुराल में उसे वो मां-बाप का प्यार और परिवार मिलेगा जिसकी कमी उसने पूरी जिंदगी महसूस की. विकास के साथ वह अपनी नई गृहस्थी के सपने संजो रही थी. घर में खुशियों का माहौल दोगुना तब हुआ जब पता चला कि नेहा गर्भवती है. कुछ ही समय में घर में नन्हे मेहमान की किलकारियां गूंजने वाली थीं. लेकिन 9 जून की तारीख ने सबकुछ खत्म कर दिया.
100 रुपये का विवाद और बिखर गया परिवार
जानकारी के मुताबिक, यह खूनी खेल महज 100 रुपये के पुराने विवाद को लेकर शुरू हुआ था. मामूली कहासुनी ने इतना भयानक रूप लिया कि आरोपियों ने दुकान पर बैठे पिता सोहन लाल अग्रवाल और बेटे विकास अग्रवाल पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं. ऑन द स्पॉट हुई इस हत्या ने इलाके में सनसनी फैला दी.
विकास के चचेरे भाई ने रोते हुए बताया 'दुकान के काउंटर पर बैठे दो लोगों को गोलियां मार दी गईं. विकास की शादी को अभी सिर्फ 6 महीने हुए थे. उसकी एक बहन बोल और सुन नहीं सकती, उसकी पत्नी 3 महीने की प्रेग्नेंट है. उस मासूम बच्चे और पत्नी को क्या जवाब देंगे? एक झटके में पूरा घर उजाड़ दिया.'
विकास की मां की स्थिति शब्दों से परे है. उन्होंने एक ही दिन में अपना पति सोहन लाल और इकलौता बेटा दोनों को खो दिया. जिस बेटे की शादी देख उनकी आंखें खुशी से छलक रही थीं आज उन्हीं आंखों में कभी न खत्म होने वाला दर्द है.
वहीं, नेहा जो इस घटना के बाद से बार-बार बेहोश हो रही है. उसकी जिंदगी में अब सिर्फ सन्नाटा है. जिस बच्चे के स्वागत की तैयारियां घर में चल रही थीं, अब वह बच्चा अपने पिता को कभी देख नहीं पाएगा. वह बच्चा अब अपने पिता को सिर्फ तस्वीरों में देख सकेगा. बागपत की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि कैसे मामूली सा विवाद और इंसान का गुस्सा एक पूरे परिवार को कब्रगाह में तब्दील कर सकता है.
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