मामूली कहासुनी, शराब का सिर चढ़कर बोलता नशा और कार पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा 'पुलिस'... आरोपियों को लगा कि इस रौब के आगे कानून उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा. लेकिन झांसी पुलिस ने ऐसी घेराबंदी की कि महज 7 घंटे के भीतर पूरी रंगबाजी की हवा निकल गई. सीपरी बाजार क्षेत्र से अगवा किए गए व्यापारी विकास गुप्ता को पुलिस ने सकुशल मुक्त करा लिया है. वहीं खाकी के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले दो आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं. जिस गाड़ी के दम पर यह दुस्साहस किया गया था, वह भी अब पुलिस की कस्टडी में खड़ी है.
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मदद की पूछताछ पर दी गालियां फिर जबरन गाड़ी में पटका
घटना 6 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे की है. झांसी के रहने वाले व्यापारी विकास गुप्ता एलाइट से लौट रहे थे. अटल चौक के पास एक एक्सीडेंटल गाड़ी देखकर उन्होंने अपनी कार रोकी और पास में खड़ी एक बलेनो कार के सवारों से पूछ लिया कि क्या कोई हादसा हुआ है.
बलेनो कार में बैठकर शराब पी रहे युवकों ने मदद करने के बजाय सीधे भद्दी गालियां देनी शुरू कर दीं. विकास कुछ समझ पाते और अपने भाई को फोन कर बुलाते, उससे पहले ही शराब के नशे में धुत दोनों युवकों ने उन्हें खींचकर अपनी कार की पिछली सीट पर पटक दिया और तेजी से फरार हो गए.
7 घंटे तक चला हाई-वोल्टेज ऑपरेशन
वारदात के बाद रात करीब 10:30 से 10:45 के बीच यूपी 112 पर अपहरण की सूचना मिलते ही हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सीपरी बाजार पुलिस और एसओजी/स्वाट टीम तुरंत एक्शन में आई. कार का नंबर ट्रेस कर पुलिस टीमों ने लगातार लोकेशन बदलते हुए किडनैपर्स का पीछा किया. करीब 7 घंटे तक चले इस ऑपरेशन के बाद पुलिस ने कार को चारों तरफ से घेर लिया. अगवा विकास गुप्ता को सुरक्षित बाहर निकाला गया और दोनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया.
शिक्षक आरोपी, पिता इंस्पेक्टर और कार सिपाही की
पकड़े गए आरोपियों की पहचान रवि यादव और विनय यादव के रूप में हुई है. पुलिस पूछताछ में जो खुलासे हुए उन्होंने सभी को हैरान कर दिया. गिरफ्तार आरोपी रवि यादव पेशे से एक सरकारी टीचर है. रवि के पिता यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में महोबा जिले में तैनात हैं. जिस बलेनो कार से किडनैपिंग की गई उस पर पुलिस लिखा था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह कार हरेंद्र नाम के एक पुलिस सिपाही की है. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि कार पर 'पुलिस' लिखकर उसका इस्तेमाल किस अधिकार से किया जा रहा था.
डेढ़ घंटे तक पीटते रहे...
पुलिस की हिरासत से सुरक्षित छूटे व्यापारी विकास गुप्ता ने अपना खौफनाक अनुभव शेयर करते हुए बताया कि 'वे लोग मुझे कार में डालकर डेढ़ घंटे तक बेरहमी से पीटते रहे. मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मेरी गलती क्या थी. मारपीट के दौरान वे फोन पर किसी तीसरे शख्स से लगातार बात कर रहे थे जो उन्हें गाइड कर रहा था कि बंदे को उठा तो लाए हो, अब आगे क्या करना है.'
सलाखों के पीछे पहुंचे आरोपी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कोई पुरानी रंजिश का मामला नहीं था बल्कि शराब के नशे में हुई अचानक बहसबाजी का नतीजा था. आरोपियों को गलतफहमी थी कि 'पुलिस' लिखी गाड़ी देखकर रास्ते में कोई उन पर शक नहीं करेगा. फिलहाल दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है. झांसी पुलिस के इस क्विक एक्शन ने साफ कर दिया है कि कानून के आगे न तो सरकारी नौकरी ढाल बनेगी और न ही किसी खाकी वाले रिश्तेदार का रसूख.
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