आगरा में देर रात गढ्ढे में फंसी एंबुलेंस, जन्म से पहले ही हो गई मासूम की मौत, आखिर किसकी गलती से हुआ ये सब?

अरविंद शर्मा

• 01:28 PM • 08 Sep 2026

आगरा में प्रसव पीड़ा से जूझती महिला की एंबुलेंस सड़क पर फंस गई. ग्रामीणों ने दो घंटे देरी का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने दावे खारिज किए. प्रसव के बाद नवजात बच्ची की मौत हुई. मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं.

Agra Ambulance Case

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सोचिए, आधी रात को जब किसी घर में एक नई जिंदगी दस्तक देने वाली हो और प्रसव पीड़ा से कराहती मां के लिए बुलाई गई एंबुलेंस अस्पताल पहुंचने के बजाय कीचड़ और गड्ढों में फंस जाए. उत्तर प्रदेश के आगरा से आई यह खबर केवल एक जर्जर सड़क की कहानी नहीं बल्कि सिस्टम की उस कथित लापरवाही का आईना है जिसकी कीमत एक नवजात मासूम को अपनी सांसें देकर चुकानी पड़ी. एक तरफ जहां ग्रामीण PWD की अनदेखी और एंबुलेंस के 2 घंटे तक फंसे रहने का आरोप लगा रहे हैं. वहीं प्रशासन ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.

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क्या है पूरा मामला?

ये पूरी घटना आगरा के बाह तहसील के गढ़वार गांव की है. 2 सितंबर 2026 की रात करीब 1 बजे जब निधि को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजनों ने उम्मीद के साथ 108 सरकारी एंबुलेंस को फोन किया. एंबुलेंस गांव के पास पहुंची तो सही लेकिन मुकुंदपुरा के पास लोक निर्माण विभाग (PWD) का क्षतिग्रस्त लिंक मार्ग काल बनकर खड़ा हो गया. जलभराव और गहरे गड्ढों के कारण एंबुलेंस रास्ते में ही धंस गई.

जब ट्रैक्टर से खींचनी पड़ी एंबुलेंस

गांव वालों का दावा है कि एंबुलेंस लगभग दो घंटे तक सड़क के कीचड़ में फंसी रही. आधी रात को चीख-पुकार के बीच ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाई और ट्रैक्टर की मदद से किसी तरह एंबुलेंस को खींचकर बाहर निकाला. इसके बाद दूसरे रास्ते से मरीज को ले जाया गया. परिजनों का आरोप है कि इलाज में हुई इसी देरी के कारण प्रसूता को समय पर सही चिकित्सीय मदद नहीं मिल सकी और प्रसव के बाद नवजात बच्ची ने दम तोड़ दिया.

इलाज में देरी के आरोप गलत- प्रशासन ने क्या बताया

मामला गरमाने के बाद बाह के एसडीएम विनोद कुमार ने ग्रामीणों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. प्रशासन के मुताबिक बारिश के कारण सड़क आंशिक रूप से खराब थी. लेकिन चालक की सूझबूझ से एंबुलेंस महज 10 से 15 मिनट ही रुकी और रात 3 बजे प्रसूता को जैतपुर सीएचसी पहुंचा दिया गया. सीएचसी में भर्ती के समय जच्चा और बच्चा दोनों की हालत सामान्य थी. डाइलेशन न होने के कारण महिला को निरंतर निगरानी में रखा गया था.

परिजन सुबह 5 बजे अपनी मर्जी से महिला को किसी निजी अस्पताल ले गए जहां प्रसव के दौरान दुर्भाग्यवश बच्चे की मौत हो गई. प्रशासन का कहना है कि एंबुलेंस के घंटों फंसे रहने की बात निराधार है. फिर भी निष्पक्ष जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है.

एक महीने से टूटी थी सड़क

ग्रामीणों का आरोप है कि मुकुंदपुरा के पास यह लिंक मार्ग पिछले एक महीने से जर्जर हालत में था जिसकी शिकायत PWD के अधिकारियों से कई बार की गई थी. अगर समय रहते इस 200 मीटर के टुकड़े पर सीसी रोड बन जाती, तो यह नौबत न आती. ग्रामीणों ने संपूर्ण समाधान दिवस पर तहसील बाह पहुंचकर जिम्मेदार PWD कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई और पक्की सड़क बनाने की मांग की है. हालांकि एसडीएम का दावा है कि घटना के तुरंत बाद PWD विभाग द्वारा सड़क की मरम्मत करवा दी गई है.
 

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