Sahjanwa Assembly Seat: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर की सहजनवा विधानसभा सीट की राजनीति हमेशा से दिलचस्प रही है. यह पूर्वांचल की उन चुनिंदा सीटों में से एक है, जहां की जनता हर बार बदलाव पसंद करती है. यहां के वोटर्स ने बीजेपी, सपा, बसपा, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवारों तक को जीतने का मौका दिया है. हालांकि, 2017 और 2022 के चुनावों में लगातार जीतकर बीजेपी ने इस परंपरा को बदला है. 2022 के चुनाव में बीजेपी के प्रदीप शुक्ला ने सपा के यशपाल सिंह रावत को 43,000 से ज्यादा वोटों से हराया था. अब 2027 के चुनाव को लेकर यहां तैयारियां तेज हो गई हैं, जहां बीजेपी जीत की हैट्रिक लगाना चाहती है, तो वहीं सपा वापसी का दावा कर रही है.
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हर चुनाव में होता है बदलाव
सहजनवा सीट का चुनावी इतिहास काफी बदलता रहा है. साल 2002 में यहां से बसपा के जीएम सिंह विधायक बने थे. इसके बाद 2007 में समाजवादी पार्टी से टिकट कटने पर यशपाल सिंह रावत ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. 2012 में फिर बदलाव हुआ और बसपा के बृजेश सिंह विधायक बने. इसके बाद 2017 में बीजेपी के शीतल पांडे ने बड़ी जीत हासिल की. 2022 में बीजेपी ने अपना उम्मीदवार बदला और प्रदीप शुक्ला को मैदान में उतारा, जिन्होंने पार्टी को फिर से जीत दिलाई.
विकास के दम पर बीजेपी तैयार
आगामी चुनाव को लेकर बीजेपी अपनी सरकार के विकास कार्यों के दम पर जीत का दावा कर रही है. पार्टी का कहना है कि सहजनवा में सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाओं में बहुत काम हुआ है. यहां अटल आवासीय विद्यालय, आश्रम पद्धति विद्यालय, पॉलिटेक्निक और मिनी स्टेडियम बनाए गए हैं. इसके अलावा गीडा (GIDA) में जहां पहले कुछ ही कंपनियां थीं, वहां अब 350 से ज्यादा कंपनियां काम कर रही हैं, जिससे लोगों को रोजगार मिल रहा है. जल्द ही यहां एलिवेटेड फ्लाईओवर का काम भी शुरू होने वाला है.
सपा उठा रही है स्थानीय मुद्दे
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी स्थानीय और बड़े मुद्दों के सहारे वापसी की उम्मीद कर रही है. सपा का कहना है कि सहजनवा में फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और राख से भारी प्रदूषण हो रहा है, जिससे जनता परेशान है. इसके साथ ही सपा शिक्षा, महंगाई, भ्रष्टाचार, पेपर लीक और किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार को घेर रही है. पार्टी को अपने 'पीडीए' (PDA) फॉर्मूले पर पूरा भरोसा है और उसका मानना है कि 2027 में जनता अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए साइकिल का बटन दबाएगी.
जातीय समीकरण की होती अहम भूमिका
सहजनवा विधानसभा सीट पर जातीय समीकरण बहुत मायने रखते हैं. इस सीट पर कुल वोटर्स की संख्या करीब 3 लाख 60 हजार है. इनमें ब्राह्मण वोटर्स सबसे ज्यादा प्रभावी हैं, जिनकी संख्या लगभग 1 लाख है. इसके अलावा 50 से 60 हजार निषाद वोटर्स भी हार-जीत तय करने में अहम रोल निभाते हैं. यादव, दलित, क्षत्रिय और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के वोटर्स भी अच्छी खासी संख्या में हैं, जिन्हें साधने की कोशिश हर पार्टी करती है.
सीएम योगी के चेहरे पर वोट
स्थानीय पत्रकारों और जानकारों का मानना है कि इस सीट पर मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है. सहजनवा ब्राह्मण बहुल क्षेत्र है, इसलिए सभी पार्टियां ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की कोशिश करती हैं. जानकारों के मुताबिक, यहां के लोग किसी स्थानीय प्रत्याशी को देखकर नहीं, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे और उनके काम को देखकर वोट देते हैं. फिलहाल यहां बीजेपी मजबूत नजर आ रही है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि 2027 में जनता बदलाव करती है या फिर से कमल खिलाती है.
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