गोरखपुर में जलभराव के बाद जनता की दो टूक, रवि किशन को लेकर कही बड़ी बात

यूपी तक

• 10:31 AM • 28 Sep 2026

Gorakhpur News: गोरखपुर में भारी बारिश के बाद हुए जलभराव को लेकर स्थानीय लोगों ने सिस्टम, अधिकारियों और नेताओं पर सवाल उठाए हैं. लोगों ने रवि किशन के सड़क पर उतरने और प्रशासन की तैयारियों को लेकर भी अपनी राय रखी.

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Gorakhpur News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में लगातार दो-तीन दिनों की भारी बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया है. शहर में हुए इस जलभराव के बाद से ही सिस्टम और प्रशासन पर सवाल उठने लगे हैं. जलभराव को लेकर बीजेपी सांसद रवि किशन भी काफी चर्चा में आ गए हैं. गोरखपुर की जनता इस स्थिति के लिए किसे जिम्मेदार मानती है? क्या यह सिर्फ प्रकृति का कहर है या फिर सिस्टम और अधिकारियों की नाकामी? इन तमाम सवालों को लेकर गोरखपुर के आम लोगों ने अपनी राय रखी है, जिसमें ज्यादातर लोगों ने इस दुर्दशा के लिए लचर सिस्टम, अधिकारियों की लापरवाही और नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है.

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जलभराव के लिए सिस्टम और अधिकारी दोषी

गोरखपुर के स्थानीय निवासी अभिषेक का मानना है कि शहर में पदों और नेताओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए कोई सुनियोजित प्लान नहीं है. वहीं, एक अन्य निवासी आनंद ने सीधे तौर पर सिस्टम और अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह सब कमीशनखोरी का नतीजा है. उनका आरोप है कि 100 रुपये का काम 30 रुपये में होता है और 70 रुपये कमीशन में चले जाते हैं, जिसकी वजह से काम सही से नहीं होता और जलभराव जैसी स्थिति पैदा होती है. रमाशंकर यादव ने भी अधिकारियों की कमी बताते हुए कहा कि सीवर लाइनें सही नहीं हैं, नाले चोक हो गए हैं और अवैध कब्जे के कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है.

रवि किशन के सड़क पर उतरने पर क्या बोले लोग?

जलभराव के दौरान सांसद रवि किशन के सड़क पर उतरने को लेकर भी लोगों की अलग-अलग राय है. अभिषेक का कहना है कि उन्होंने बड़े नेताओं को इसलिए नहीं चुना कि वे सड़क पर उतरें, बल्कि उन्हें सदन में बैठकर अधिकारियों पर नकेल कसनी चाहिए. विनय सिंह ने माना कि रवि किशन ग्राउंड पर उतरे थे, लेकिन लोगों का यह भी कहना है कि वे तब उतरे जब एक पार्षद द्वारा आरोप लगाया गया और बातचीत का वीडियो वायरल हुआ. हालांकि, विनय सिंह ने इस जलभराव के लिए प्रकृति को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि ऐसी जबरदस्त बारिश 16-17 सालों में नहीं देखी गई है.

मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी लापरवाही

स्थानीय निवासी शिवम ने सिस्टम और देखभाल करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मौसम विभाग ने तीन दिन पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दे दी थी, तो प्रशासन को पहले से ही तैयारी कर लेनी चाहिए थी. उन्होंने कहा कि आपदा आने के बाद सड़क पर उतरकर दिखाने का कोई मतलब नहीं है. जनता ने नेताओं को इसलिए चुना है ताकि वे पहले से तैयारी करें और आम लोगों को परेशानी न हो. लोगों का साफ कहना है कि अगर मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लिया गया होता और समय रहते प्रयास किए गए होते, तो शायद शहर में जलभराव की इतनी भयावह स्थिति नहीं बनती.