UP Trade Show 2026: रंगदारी और खौफ के साए से ग्लोबल इंवेस्टमेंट हब बनने तक, जानिए कैसे बदला यूपी

यूपी तक

• 12:26 PM • 29 Sep 2026

उत्तर प्रदेश में निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए ग्रेटर नोएडा इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 आयोजित किया गया जिसमें स्थानीय उत्पादकों और निवेशकों को जोड़ा गया.

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एक दौर था जब उत्तर प्रदेश का जिक्र आते ही अपराध, अपहरण, बदहाल सड़कें और उद्योगों के पलायन की तस्वीरें जेहन में उभरती थीं. लेकिन आज वही उत्तर प्रदेश देश-दुनिया के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है. ग्रेटर नोएडा में आयोजित 'यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026' इस बड़े बदलाव की सबसे जीवंत मिसाल है. 

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यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026: 'लोकल' को 'ग्लोबल' बनाने का महामंच

ग्रेटर नोएडा में आयोजित 5 दिवसीय यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का मकसद प्रदेश के छोटे कारोबारियों, कारीगरों, स्टार्टअप्स और बड़े उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ना है.

2400 से ज्यादा एग्जीबिटर्स: राज्य भर के स्थानीय व बड़े उद्योगों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया.

6 पार्टनर देश: जापान, रूस, सिंगापुर, वियतनाम, ऑस्ट्रिया और बेलारूस इस आयोजन के आधिकारिक पार्टनर देश हैं.

B2B और नेटवर्किंग: विदेशी खरीदारों और भारतीय उद्यमियों को सीधे जोड़ने के लिए डिजिटल मैचमेकिंग और B2B बैठकों की विशेष व्यवस्था की गई है.

'जीरो टॉलरेंस' और सुरक्षा: निवेशकों के भरोसे की पहली शर्त

कोई भी निवेशक अपना पैसा लगाने से पहले सुरक्षा और स्थिरता देखता है. योगी सरकार ने अपराध के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाकर औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षित माहौल तैयार किया है.

रंगदारी, रंगदारी वसूली और बाहुबलियों के खौफ को खत्म कर प्रशासनिक पारदर्शिता पर जोर दिया गया है. जब उद्योगपतियों को यह भरोसा मिलता है कि उनका माल, संपत्ति और कर्मचारी सुरक्षित हैं, तभी बड़ा निवेश धरातल पर उतरता है.

एक्सप्रेसवे और नोएडा एयरपोर्ट

व्यापार की दुनिया का नियम है कि उत्पादन के साथ-साथ माल का सही समय पर बाजार तक पहुंचना जरूरी है. उत्तर प्रदेश ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं.

एक्सप्रेसवे नेटवर्क: पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे ने राज्य के दूर-दराज के इलाकों को बड़े बाजारों से जोड़ा है.

जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: एयर कनेक्टिविटी और कार्गो सुविधाओं के जरिए वैश्विक व्यापार को सीधी रफ्तार मिलेगी.

लॉजिस्टिक्स पार्क और रेल कनेक्टिविटी: माल ढुलाई की लागत कम करने के लिए इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स हब तैयार किए जा रहे हैं.

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

कारोबार शुरू करने में सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटना सबसे बड़ी रुकावट होती है.उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए 'निवेश मित्र' जैसे सिंगल विंडो पोर्टल की शुरुआत की है.

इसके जरिए एनओसी (NOC), जमीन आवंटन और जरूरी मंजूरियां एक ही जगह पारदर्शी तरीके से मिलती हैं. इसके अलावा MSME उद्योगों के लिए कई नियमों में ढील देकर कारोबारी माहौल को सुगम बनाया गया है.

ODOP और ODOC: बनारसी साड़ी से कन्नौज के इत्र तक को नई पहचान

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसके पारंपरिक हस्तशिल्प और कारीगर हैं. 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना के जरिए जिलों के खास उत्पादों की ब्रांडिंग की गई है.

पारंपरिक उत्पाद: वाराणसी की बनारसी साड़ी, भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल के बर्तन और कन्नौज का इत्र अब वैश्विक खरीदारों तक पहुंच रहे हैं.

ODOC (वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन): इस बार ट्रेड शो में प्रदेश के पारंपरिक खानपान और फूड प्रोडक्ट्स को भी अंतरराष्ट्रीय पहचान दी जा रही है.

रोजगार सृजन: जब किसी स्थानीय उत्पाद की मांग बढ़ती है तो उससे जुड़े कारीगरों, पैकेजिंग और परिवहन से जुड़े स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर बनते हैं.