Ex-IAS Divya Mittal News: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर को अपने अगले कदम का ऐलान कर दिया है. IAS से इस्तीफा देने के बाद अपने भविष्य को लेकर सस्पेंस बनाए रखने वाली दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर कहा कि वह अब राजनीति में उतरेंगी. उन्होंने साफ किया कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं, बल्कि लोगों के साथ राजनीति करेंगी. दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक शुरुआत यहीं से होगी.
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'अभी कुछ दिन पहले मैंने IAS से त्यागपत्र दिया'
दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो की शुरुआत लोगों को नमस्कार करते हुए की. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने IAS से त्यागपत्र दिया था और इसके बाद लोगों के मन में कई सवाल थे. उन्होंने कहा, 'कुछ दिनों तक जवाब नहीं दिया क्योंकि काम बड़ा था और मैं हौसला जुटा रही थी. पर आज उन सवालों के जवाब देने आई हूं.' दिव्या ने अपने सामने मौजूद तीन सवालों का जिक्र किया- आगे क्या, किसके साथ और कहां से. इसके बाद उन्होंने सबसे पहले साफ किया कि वह आगे राजनीति करेंगी. उन्होंने कहा, 'मुझे आवाज बनना है. उन लोगों की आवाज, जिनकी आवाज किसी दफ्तर तक नहीं पहुंच पाती और अगर पहुंच भी जाए तो सुनी नहीं जाती.' उन्होंने देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब मांगने की बात भी कही.
'राजनीति में सत्ता है, शोर है, पर सोच नहीं'
दिव्या मित्तल ने राजनीति को लेकर अपने विचार भी साझा किए. उन्होंने कहा, 'आज हमारी राजनीति में सब कुछ है. सत्ता है, शिलान्यास है, शोर है, पर सोच नहीं है. मुझे उस न सोचने का हिसाब चाहिए.' उन्होंने कहा कि उनका मकसद सिर्फ किसी एक राजनेता को बदलना नहीं है, बल्कि राजनीति के तौर-तरीके को बदलना है. उन्होंने इरादे, न्याय, फिक्र और सोच की राजनीति की बात कही. दिव्या के मुताबिक, राजनीति ऐसी नहीं होनी चाहिए जिसमें लोगों को सिर्फ गिना जाए और उन्हें सत्ता तक पहुंचने की सीढ़ी बनाया जाए. उन्होंने कहा, 'लोग ही तो मंजिल हैं.'
किसी दल के साथ नहीं, 'केवल लोगों के साथ'
दिव्या मित्तल ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसके साथ राजनीति करेंगी. उन्होंने कहा कि जब मंजिल लोग हैं तो उस मंजिल तक पहुंचने का रास्ता भी लोगों से होकर ही जाएगा. उन्होंने कहा, 'इसलिए मैं राजनीति करूंगी किसी दल के साथ नहीं, केवल आपके साथ, केवल लोगों के साथ.' उन्होंने कहा कि वह किसी झंडे के नीचे खड़े होकर राजनीति नहीं करना चाहतीं. उनके मुताबिक, जो किसी व्यवस्था का हिस्सा बन जाता है, वह उसका हिसाब नहीं मांग सकता. इसी वजह से उन्होंने अपनी राजनीति को लोगों के साथ जोड़ने की बात कही.
'एक महिला को डराने की कोशिश हुई'
दिव्या ने राजनीति में आने के बाद सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र भी किया. उन्होंने बताया कि इस्तीफे के कुछ घंटों के भीतर ही एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने उनके बारे में लिखा कि वह रात के अंधेरे में दूसरी बड़ी पार्टी के एक बड़े नेता से मिली थीं. दिव्या ने कहा, 'वो मुलाकात कभी नहीं हुई थी. यह बात लिखने वाले को भी पता थी.' उन्होंने आरोप लगाया कि इसका मकसद एक महिला को डराना था, जो सवाल पूछने के लिए आगे आई है. उन्होंने कहा कि राजनीति में FIR और ट्रोलिंग के जरिए लोगों को डराने की कोशिश होती है, लेकिन वह डरेंगी नहीं और सवाल पूछती रहेंगी.
'पैसा, बाहुबल और जाति-धर्म का समीकरण नहीं'
दिव्या मित्तल ने कहा कि उनके पास चुनावी राजनीति के लिए पैसा नहीं है, बाहुबल नहीं है और जाति-धर्म का समीकरण भी नहीं है. उन्होंने कहा, 'तीनों बातें सही हैं.' इसके बाद उन्होंने चुनाव में खर्च होने वाले पैसे के स्रोत पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, 'जो पैसा चुनाव में बहाया जाता है, वह कहां से आता है? वह हमारी सड़क से आता है, हमारे पुल से आता है, हमारे स्कूल से आता है.' दिव्या ने कहा कि उन्हें वह पैसा नहीं बहाना, बल्कि वह सड़क चाहिए. बाहुबल की जगह उन्होंने जनता से बनने वाली शक्ति की बात कही.
इस तरह IAS से इस्तीफा देने के बाद अपने अगले कदम को लेकर सस्पेंस बनाए रखने वाली दिव्या मित्तल ने 29 सितंबर को साफ कर दिया कि वह राजनीति में उतरेंगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी और वह किसी राजनीतिक दल के बजाय लोगों के साथ राजनीति करने की बात कह रही हैं.
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