अखिलेश यादव नहीं लड़ेंगे विधानसभा चुनाव, फिर कौन बनेगा मुख्यमंत्री? जानें सपा की पूरी रणनीति

कुमार अभिषेक

• 02:31 PM • 05 Nov 2026

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि वह 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और सांसद रहते हुए ही मुख्यमंत्री बनेंगे. उन्होंने इसे अपने लिए शुभ बताते हुए 2012 का उदाहरण दिया है.

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समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि वह 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. अखिलेश का कहना है कि वह सांसद रहते हुए ही यूपी के मुख्यमंत्री बनेंगे. उन्होंने इसे एक 'टोटका' बताते हुए कहा कि साल 2012 में भी वह चुनाव लड़े बिना मुख्यमंत्री बने थे और इस बार भी वह वही काम करेंगे जो उनके लिए शुभ होगा. हालांकि, सियासी जानकारों का मानना है कि यह कोई टोटका या अंधविश्वास नहीं है, बल्कि अखिलेश यादव की एक सोची-समझी और सधी हुई सियासी रणनीति है. इस फैसले के पीछे 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी द्वारा रची गई वह चक्रव्यूह जैसी रणनीति है, जिसने अखिलेश यादव और पूरे यादव परिवार को एक ही सीट पर उलझा कर रख दिया था.

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2012 का टोटका और मुख्यमंत्री पद

हाल ही में जब पत्रकारों ने अखिलेश यादव से चुनाव लड़ने को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "काशी के लोग शुभ समय क्या है, खराब समय क्या है, इसका बहुत ज्ञान रखते हैं. हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं. इसलिए वही काम करेंगे जो हमारे लिए शुभ होगा." अखिलेश यादव ने 2012 का हवाला दिया, जब वह कन्नौज से लोकसभा सांसद थे और विधानसभा चुनाव लड़े बिना ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे. बाद में उन्होंने विधान परिषद (MLC) के जरिए अपनी सदस्यता ली थी.

2022 में बीजेपी की चक्रव्यूह वाली रणनीति

सियासी जानकारों के मुताबिक, अखिलेश के चुनाव न लड़ने के फैसले के पीछे 2022 का विधानसभा चुनाव बड़ा कारण है. 2022 में अखिलेश यादव मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लड़े थे. अखिलेश को अपने ही गढ़ में उलझाने के लिए बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री और पुराने सपा नेता एसपी सिंह बघेल को उनके खिलाफ मैदान में उतार दिया था. एसपी सिंह बघेल के मैदान में उतरते ही समाजवादी पार्टी का पूरा यादव परिवार (डिंपल यादव, शिवपाल यादव, रामगोपाल यादव, धर्मेंद्र यादव) कई दिनों तक सिर्फ करहल में ही चुनाव प्रचार करता रह गया.

सपा के प्रचार पर पड़ा था असर

करहल सीट पर बीजेपी की रणनीति इतनी सटीक थी कि चुनाव जीतने के बावजूद सपा के पूरे चुनाव अभियान पर इसका असर पड़ा. खुद एसपी सिंह बघेल ने दावा किया था कि उन्होंने अकेले अखिलेश के परिवार को 20 दिनों तक करहल में रोक कर सपा की करीब 500 चुनावी सभाएं रोक दी थीं. अखिलेश यादव सपा के इकलौते और सबसे बड़े स्टार प्रचारक हैं. उन्हें पता है कि अगर वह चुनाव लड़ते हैं, तो बीजेपी फिर से उनके खिलाफ कोई मजबूत उम्मीदवार उतारकर उन्हें एक सीट पर फंसा देगी. ऐसे में वह इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहते और खुद को पूरे प्रदेश में प्रचार करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र (फ्री) रखना चाहते हैं.