सपा-कांग्रेस में सीट शेयरिंग पर बढ़ी खटास! 150 सीटों की मांग से अखिलेश नाराज? बैठक से बनाई दूरी

यूपी तक

29 Sep 2026 (अपडेटेड: 29 Sep 2026, 12:18 PM)

उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है. कांग्रेस की ओर से अक्टूबर में गठबंधन को अंतिम रूप देने और कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात सामने आने के बाद दोनों दलों के बीच मतभेद और चर्चा में आ गए हैं.

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उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच खींचतान बढ़ती दिखाई दे रही है. कांग्रेस की ओर से अक्टूबर में गठबंधन को अंतिम रूप देने और कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात सामने आने के बाद दोनों दलों के बीच मतभेद और चर्चा में आ गए हैं. कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि पार्टी की तैयारी सभी 403 सीटों पर चल रही है और गठबंधन होने की स्थिति में सम्मानजनक हिस्सेदारी की उम्मीद है. वहीं, अखिलेश यादव के कांग्रेस की ओर से बुलाई गई इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल नहीं होने के फैसले को भी इसी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, अखिलेश की ओर से बैठक में नहीं जाने की वजह के तौर पर अन्य कार्यक्रम होने की बात भी सामने आई है.

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इमरान मसूद के बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी का बयान

सीट शेयरिंग को लेकर अब तक कांग्रेस नेता इमरान मसूद लगातार समाजवादी पार्टी पर दबाव बनाने की बात कहते रहे थे. वह जल्द सीट बंटवारे पर बातचीत शुरू करने और राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात करते रहे हैं. अब कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के बयान से पार्टी का रुख और स्पष्ट हुआ है. उन्होंने कहा कि गठबंधन पर बातचीत अक्टूबर में शुरू होगी और सम्मानजनक हिस्सेदारी होनी चाहिए. उनके मुताबिक कांग्रेस बराबर सम्मान और बराबर सीटों की उम्मीद रखती है, हालांकि सीटों की संख्या में थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे होने की गुंजाइश भी है.

कांग्रेस ने कहा- 403 सीटों पर तैयारी

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि कांग्रेस की तैयारी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चल रही है. उन्होंने इसके पीछे की वजह बताते हुए कहा कि गठबंधन होने पर सहयोगी दलों के उम्मीदवारों को भी जिताने में मदद करनी होगी. इसी बीच कांग्रेस की ओर से कम से कम 150 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की बात सामने आई है. इससे समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत और कठिन होती दिख रही है. इमरान मसूद ने पहले भी यूपी तक से बातचीत में दावा किया था कि कुछ महीने पहले 167 सीटों की सूची समाजवादी पार्टी को सौंपी जा चुकी है.

सपा की आपत्ति- पहले जिताऊ सीट और उम्मीदवारों पर बात हो

समाजवादी पार्टी का तर्क है कि कांग्रेस को पहले उन सीटों और उम्मीदवारों की जानकारी सामने रखनी चाहिए जहां उसका संगठन मजबूत है. पार्टी की ओर से कांग्रेस से यह भी कहा गया है कि वह अपने जिताऊ उम्मीदवारों और मजबूत सीटों को सामने रखे, इसके बाद सीटों की संख्या पर चर्चा हो. सपा का मानना बताया गया है कि केवल सीटों की संख्या तय करने के बजाय यह भी देखा जाना चाहिए कि कांग्रेस किन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है और वहां उसकी चुनावी स्थिति कैसी है.

राहुल गांधी के नेतृत्व का मुद्दा भी अहम

सीट शेयरिंग के साथ चुनाव के नेतृत्व को लेकर भी दोनों दलों के बीच मतभेद की बात सामने आ रही है. इमरान मसूद लगातार कहते रहे हैं कि चुनाव राहुल गांधी के नेतृत्व में या राहुल गांधी के बनाए माहौल में ही लड़ा जाना चाहिए. स्टोरी में यह भी कहा गया है कि समाजवादी पार्टी के भीतर यह माना जा रहा था कि ऐसी बातें सिर्फ इमरान मसूद की व्यक्तिगत राय नहीं हैं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व का रुख भी इससे जुड़ा हो सकता है. इसी वजह से सपा के बड़े नेताओं ने इस मुद्दे पर खुलकर बयान देने से दूरी बनाए रखी है.

अखिलेश यादव इंडिया ब्लॉक की बैठक में नहीं जाएंगे

अखिलेश यादव ने 30 तारीख को होने वाली इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला किया है. उनकी जगह उनका प्रतिनिधि बैठक में जाएगा. यह बैठक ममता बनर्जी की मांग पर बुलाई गई है और इसमें वोट चोरी तथा SIR में नाम कटने जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा होनी है. अखिलेश यादव इन मुद्दों पर लगातार हमलावर रहे हैं. ऐसे में उनका बैठक से दूर रहना चर्चा का विषय बना हुआ है. स्टोरी में उनकी दूरी को कांग्रेस के सीट शेयरिंग वाले रुख से जुड़ी नाराजगी के तौर पर भी देखा गया है.

कांग्रेस भी सिर्फ सपा पर निर्भर नहीं रहना चाहती

विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि कांग्रेस सीट बंटवारे को चुनाव के आखिरी समय तक टालना नहीं चाहती. पार्टी चाहती है कि अभी यह तय हो कि उसे कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है और कौन-कौन सी सीटें उसके हिस्से में आएंगी. इसके पीछे कांग्रेस की यह चिंता बताई गई है कि अगर फैसला देर से हुआ तो सीट शेयरिंग का मामला समाजवादी पार्टी की शर्तों पर ज्यादा निर्भर हो सकता है. कांग्रेस की ओर से यह रुख सामने आने की बात कही गई है कि या तो अभी सीटें तय हों या फिर उसे अपने विकल्पों पर विचार करना पड़ेगा.

गठबंधन पर संकट के संकेत

फिलहाल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों गठबंधन के साथ आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर दोनों का रुख सख्त दिखाई दे रहा है. कांग्रेस कम से कम 150 सीटों की मांग कर रही है, जबकि सपा इतनी सीटें देने के लिए तैयार नहीं बताई जा रही. अखिलेश यादव का इंडिया ब्लॉक की बैठक में नहीं जाना भी इसी तनाव के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि अक्टूबर में होने वाली बातचीत के दौरान दोनों दल सीट बंटवारे पर किस तरह सहमति बनाते हैं और गठबंधन को किस रूप में आगे बढ़ाया जाता है.