Inspiring Story: कभी लाइब्रेरी में थी 15 हजार की नौकरी, अब ये काम कर नोएडा की किरन हर महीने कमा रही 36000 रुपये

यूपी तक

• 01:03 PM • 20 Jul 2026

नोएडा की रहने वाली किरन की कहानी संघर्ष से सफलता तक का सफर है. पिता के निधन के बाद टीचर बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. फैक्ट्री और स्कूल लाइब्रेरी में नौकरी करने के बाद अब डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से घरेलू सेवाएं देकर हर महीने 30 से 36 हजार रुपये कमा रही हैं.

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Noida News: पढ़ाई में तेज, सपनों से भरी आंखें और टीचर बनने की चाहत... लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंज़ूर था. यह कहानी है नोएडा की किरन की, जिन्होंने कभी स्कूल लाइब्रेरी में 9 घंटे की नौकरी करके महीने के 15,000 रुपये कमाए तो कभी पैकेजिंग फैक्ट्री में 12-12 घंटे पसीना बहाया.

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आज वही किरन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ऐप बेस्ड गिग इकोनॉमी के जरिए घरों में झाड़ू-पोछा और खाना बनाकर हर महीने 30,000 से 36,000 रुपये तक कमा रही हैं. जो काम पहले केवल मजबूरी माना जाता था, उसने टेक्नोलॉजी की मदद से किरन को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना दिया है.

पिता का साया उठा तो थम गए टीचर बनने के सपने

किरन अपने 6 भाई-बहनों में सबसे बड़ी थीं. साल 2006 में जब वे 12वीं की बोर्ड परीक्षा दे रही थीं, तभी अचानक उनके पिता का निधन हो गया. परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई और सपने पीछे छूट गए.

साल 2008 में काम की तलाश में वे दिल्ली आईं. शुरुआती संघर्ष, असुरक्षित माहौल और कई शहरों (गाजियाबाद, फरीदाबाद) की भागदौड़ के बाद वे आखिरकार नोएडा में बसीं.

किरन ने ट्यूशन पढ़ाने से लेकर फैक्ट्री में मोबाइल चार्जर पैक करने तक का काम किया, जहां 8 से 12 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद केवल 12,000 रुपये मिलते थे.

लाइब्रेरी की नौकरी छूटी तो डिजिटल दुनिया ने दिया सहारा

साल 2017 में किरन को नोएडा के एक स्कूल की लाइब्रेरी में नौकरी मिली. सुबह 7 से शाम 4:30 बजे तक की ड्यूटी के बाद उन्हें 15,000 रुपये मिलते थे. लगा कि अब जिंदगी पटरी पर आ गई है, लेकिन तभी कोविड-19 और लॉकडाउन ने सब कुछ छीन लिया.

लॉकडाउन के बाद उन्होंने फिर से सोसाइटीज में झाड़ू-पोछा और खाना बनाने का काम शुरू किया. 4-5 घरों में काम करने के बाद भी वे महीने के मुश्किल से 12-13 हजार ही जुटा पाती थीं. असली बदलाव तब आया जब उन्होंने InstaHelp जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खुद को रजिस्टर किया.

टेक्नोलॉजी ने बदली जिंदगी

  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ते ही किरन की कमाई दोगुनी से भी ज्यादा हो गई.
  • अब वे अपनी सहूलियत और समय के हिसाब से काम चुनती हैं.
  • जहां पहले पूरे दिन लाइब्रेरी में खटने पर 15,000 रुपये मिलते थे, वहीं अब वे हर महीने 30,000 से 36,000 रुपये कमा रही हैं.
  • इस कमाई से वे अपने 14 साल के बेटे और 11 साल की बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ा पा रही हैं.

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने साबित कर दिया है कि टेक्नोलॉजी सिर्फ बड़े-बड़े प्रोफेशनल्स के काम की चीज नहीं है. अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह किरन जैसी लाखों महिलाओं के लिए संघर्ष और सफलता के बीच का मजबूत पुल बन सकती है.