Abhishek Chauhan Missing: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में पिंडारी ग्लेशियर ट्रेक पर गए नोएडा के 35 साल सॉफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक चौहान का चौथे दिन भी कोई सुराग नहीं मिल सका है. बीते 28 मई को खाती गांव से द्वाली की ओर ट्रेकिंग के दौरान लापता हुए अभिषेक की तलाश में एसडीआरएफ स्थानीय पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें जुटी हुई हैं. लगातार हो रही बारिश और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच सोमवार को रेस्क्यू टीम ने रस्सियों के सहारे करीब 60-70 मीटर गहरी खाई में उतरकर गहन खोजबीन की जहां से अभिषेक का कैमरा बरामद हुआ है. कैमरे की बरामदगी के बाद अनहोनी की आशंका को देखते हुए पिंडर नदी के किनारे और आसपास के इलाकों में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया गया है.
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थकान की शिकायत के बाद गाइड से बिछड़े थे अभिषेक
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के रहने वाले अभिषेक चौहान फिलहाल गुजरात में लार्सन एंड टुब्रो (L&T) कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्यरत हैं. उनके पिता रघुराज चौहान दिल्ली में बीएसएफ में तैनात हैं. अभिषेक स्थानीय गाइड आनंद राम के साथ पिंडारी ग्लेशियर के ट्रेक पर निकले थे. गाइड आनंद राम के अनुसार 29 मई को वापस लौटते समय अभिषेक ने थकान की शिकायत की थी और कुछ देर आराम करने की बात कही. गाइड जब आगे बढ़ा तो उसके कुछ समय बाद से ही अभिषेक रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए जिसके बाद प्रशासन को इसकी सूचना दी गई.
पिंडर नदी के किनारे सर्च ऑपरेशन
लापता इंजीनियर की तलाश के लिए मुख्य आरक्षी टीका सिंह कार्की के नेतृत्व में बचाव दल लगातार मुस्तैदी से जुटा हुआ है. सोमवार को टीम ने बेहद जोखिम उठाते हुए गहरी खाई में सर्च ऑपरेशन चलाया जहां से अभिषेक का निजी कैमरा तो मिल गया. लेकिन उनका कोई पता नहीं चल सका. क्षेत्र में लगातार हो रही रुक-रुक कर बारिश और अत्यधिक ठंड के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतें आ रही हैं. इसके बावजूद पिंडर नदी के मुहानों और ट्रेक के आसपास के घने व कठिन रास्तों पर रेस्क्यू टीमें लगातार आगे बढ़ रही हैं.
बेटे की तलाश में बागेश्वर पहुंचे बीएसएफ अधिकारी पिता
घटना की जानकारी मिलते ही अभिषेक के पिता रघुराज चौहान और अन्य परिजन तुरंत बागेश्वर पहुंच गए हैं. वे पल-पल की जानकारी के साथ मौके पर मौजूद रेस्क्यू टीमों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और हालात पर नजर रखे हैं. स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मौसम की चुनौतियों के बावजूद खोज अभियान को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा. युवक की सुरक्षित तलाश के लिए हर संभव आधुनिक संसाधन और स्थानीय इनपुट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.
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