CJP Protest Akshat Tripathi News: ग्रेटर नोएडा की गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल होना भारी पड़ गया है. ग्रेटर नोएडा के कार्यपालक मजिस्ट्रेट-3 ने उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत 5 लाख रुपये का नोटिस जारी किया है. पुलिस रिपोर्ट में अक्षत पर छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने और उन्हें प्रदर्शन के लिए एकजुट करने का आरोप लगाया गया है. हालांकि, छात्र ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह प्रदर्शन में शांतिपूर्ण तरीके से शामिल हुए थे. अक्षत स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं.
ADVERTISEMENT
4 सितंबर को जारी हुआ नोटिस
जानकारी के मुताबिक अक्षत त्रिपाठी को यह नोटिस 4 सितंबर को जारी किया गया. यह कार्रवाई ईकोटेक-1 थाने के एक सब-इंस्पेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है. नोटिस में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर हुए CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान अक्षत ने छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने और उन्हें एकजुट करने का प्रयास किया. इसी आधार पर शांति भंग से जुड़े मामले में उनसे 5 लाख रुपये की राशि को लेकर नोटिस जारी किया गया है. हालांकि, अक्षत ने पुलिस के इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है.
घायल होने का भी छात्र ने किया दावा
अक्षत त्रिपाठी का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के समय गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी करीब तीन महीने से बंद थी, इसलिए वह नियमित रूप से कक्षाओं में शामिल नहीं हो रहे थे. उन्होंने दावा किया कि 20 जुलाई को CJP के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई में वह घायल भी हुए थे. अक्षत का कहना है कि उन्होंने जंतर-मंतर पर केवल शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और सरकार के खिलाफ छात्रों को भड़काने जैसा कोई काम नहीं किया.
SFI ने भी दी प्रतिक्रिया
अक्षत को जारी नोटिस पर SFI ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. संगठन ने इसे विरोध करने के अधिकार का इस्तेमाल कर रहे छात्रों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने की कोशिश बताया. SFI के मुताबिक, जंतर-मंतर के प्रदर्शन में पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे. संगठन ने उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस पर असहमति की आवाज को दबाने के लिए कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है. SFI ने कहा कि छात्रों की आवाज उठाने को इस तरह की कार्रवाई से दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला
SFI ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अक्षत के खिलाफ कार्रवाई की गई. संगठन का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रही हैं. SFI ने अक्षत त्रिपाठी को जारी 5 लाख रुपये का नोटिस तत्काल वापस लेने की मांग की है. साथ ही संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों पर हमले भी किए गए, जिनका उद्देश्य आंदोलन को बाधित करना था. फिलहाल छात्र पर लगाए गए आरोपों और उसके पक्ष की बात दोनों सामने हैं.
ADVERTISEMENT











