Bijnor Crime News: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पुलिस ने ऐसे कथित गिरोह का खुलासा करने का दावा किया है, जो लोगों की पुरानी रंजिश और आपसी विवाद की जानकारी जुटाकर उन्हें मुकदमे में फंसाने का डर दिखाता था. पुलिस के मुताबिक, इसके बाद समझौता कराने या मुकदमा वापस लेने के नाम पर पैसों की मांग की जाती थी. रकम देने से इनकार करने पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराने का दबाव बनाया जाता था. इस मामले में स्वाट/सर्विलांस टीम और थाना कोतवाली शहर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों में जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा, अफजाल, गुड्डी, कुन्ती और प्रीति शामिल हैं. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित नेटवर्क में और कितने लोग जुड़े हैं और अलग-अलग मामलों में उनकी क्या भूमिका रही है.
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पर्सनल जानकारी जुटाने का आरोप
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक कथित गिरोह का तरीका लोगों की निजी और विवाद से जुड़ी जानकारी हासिल करने से शुरू होता था. आरोप है कि गिरोह से जुड़े लोग पहले यह पता करते थे कि किस व्यक्ति की किसी से पुरानी दुश्मनी है, किसके खिलाफ पहले से कोई विवाद चल रहा है या परिवार में किन लोगों के बीच तनातनी है. इसके बाद उसी जानकारी के आधार पर संबंधित व्यक्ति को दबाव में लेने की कोशिश की जाती थी. पुलिस का कहना है कि लोगों को उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होने या किसी गंभीर मामले में फंसाए जाने का डर दिखाया जाता था. फिर समझौता कराने अथवा मुकदमा वापस कराने के नाम पर रकम मांगे जाने का आरोप है. पुलिस के अनुसार, मांग मान ली जाती तो मामला वहीं खत्म करने की बात होती थी, लेकिन रकम देने से इनकार करने पर दबाव और बढ़ाया जाता था.
मोहम्मद अहसान ने की थी शिकायत
पुलिस के मुताबिक इस कथित वसूली के मामले की जानकारी उस समय सामने आई जब उमर कॉलोनी निवासी मोहम्मद अहसान ने 6 सितंबर 2026 को थाना कोतवाली शहर में लिखित शिकायत दी. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहे हैं. शिकायत में यह भी कहा गया कि मुकदमा वापस लेने के बदले उनसे पैसे मांगे जा रहे हैं. तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की. इसके बाद स्वाट/सर्विलांस टीम और थाना कोतवाली शहर की पुलिस ने संयुक्त रूप से आरोपों की पड़ताल की. पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर 7 सितंबर को पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया.
जुल्फेकार को बताया गया संचालक
बिजनौर पुलिस की अब तक की विवेचना में जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा को कथित गिरोह का संचालक बताया गया है. पुलिस के अनुसार, उसके साथ अफजाल, गुड्डी, कुन्ती, प्रीति और कुछ अन्य लोगों के जुड़े होने की जानकारी मिली है. आरोप है कि नेटवर्क में शामिल लोग पहले ऐसे व्यक्तियों को तलाशते थे, जिनका किसी अन्य व्यक्ति से विवाद या पुरानी रंजिश चल रही हो. इसके बाद उस विवाद को आधार बनाकर संबंधित व्यक्ति पर दबाव बनाया जाता था. पुलिस के मुताबिक आरोपी उसे मुकदमे में फंसने का डर दिखाते और फिर समझौता कराने या केस वापस कराने के नाम पर रकम मांगते थे. पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित गिरोह का संचालन किस तरह होता था और इसमें अलग-अलग लोगों को क्या जिम्मेदारी दी गई थी.
रकम न देने पर फंसाने का दबाव
पुलिस का दावा है कि कथित गिरोह की सबसे बड़ी साजिश डर का माहौल बनाना था. जब कोई व्यक्ति पैसे देने से इनकार करता था तो उसके खिलाफ गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज कराने का दबाव बनाया जाता था. पुलिस के मुताबिक ऐसे मामलों में गिरोह से जुड़ी महिलाओं और अन्य सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई है. आरोप है कि संबंधित व्यक्ति पर पहले समझौते के लिए दबाव बनाया जाता था और बात नहीं बनने पर उसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने या अदालत में परिवाद दाखिल कराने की कोशिश की जाती थी. पुलिस ने जांच के दौरान बलात्कार, सामूहिक दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं से जुड़े मामलों की जानकारी मिलने का दावा किया है. हालांकि पुलिस ने यह साफ किया है कि इन मामलों में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, इसका फैसला संबंधित मामलों की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा.
कई जिलों में मुकदमों की पड़ताल
बिजनौर पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में केवल बिजनौर ही नहीं, बल्कि अलग-अलग जनपदों में आरोपियों और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ दर्ज कई मुकदमों तथा न्यायालयी परिवादों की जानकारी सामने आई है. पुलिस इन सभी मामलों का रिकॉर्ड जुटा रही है. जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन मामलों के बीच कोई आपसी संबंध है या अलग-अलग लोगों ने स्वतंत्र रूप से शिकायतें दर्ज कराई थीं. पुलिस यह भी देख रही है कि कहीं अलग-अलग मामलों में एक जैसी रणनीति अपनाकर लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश तो नहीं की गई. फिलहाल पुलिस ने इन सभी मुकदमों को एक ही साजिश का हिस्सा मानकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है. अधिकारियों का कहना है कि हर मामले के तथ्यों और साक्ष्यों की अलग-अलग जांच की जाएगी.
महिलाओं को आगे कर शिकायत का आरोप
विवेचना में पुलिस को कथित गिरोह की कार्यप्रणाली का एक और पहलू पता चला है. पुलिस के मुताबिक, गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कराने के लिए नेटवर्क से जुड़ी महिलाओं और दूसरे सहयोगियों की मदद ली जाती थी. आरोप है कि पहले संबंधित व्यक्ति को डराकर या समझौते के लिए दबाव में लेने की कोशिश होती थी. अगर वह उनकी शर्तें नहीं मानता था तो उसके खिलाफ गंभीर आरोपों से जुड़ा मुकदमा या न्यायालयी परिवाद दर्ज कराने की कोशिश की जाती थी. पुलिस अब ऐसे मामलों की परिस्थितियों की जांच कर रही है और यह पता लगा रही है कि उनमें गिरफ्तार आरोपियों या उनके कथित सहयोगियों की वास्तव में क्या भूमिका रही. जांच में यह भी देखा जा रहा है कि शिकायतकर्ता और आरोपी पक्ष के बीच पहले से कोई विवाद था या उसे बाद में दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया.
5 आरोपियों की पहचान सामने आई
पुलिस ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान भी सार्वजनिक की है. पुलिस के मुताबिक, पहला आरोपी जुल्फेकार उर्फ बब्बू लंगड़ा पुत्र अय्यूब है, जो चांदपुर की चुंगी, जन्नत कॉलोनी, थाना कोतवाली शहर, बिजनौर का निवासी है. दूसरा आरोपी अफजाल पुत्र कफील है, जो भागूवाला, थाना मंडावली, बिजनौर का रहने वाला बताया गया है. तीसरी आरोपी गुड्डी पत्नी मूलचन्द्र है, जो लड़ापुरा, थाना कोतवाली नगर, बिजनौर की निवासी है. चौथी आरोपी कुन्ती पत्नी ओमप्रकाश है, जिसका पता मोहल्ला कस्सावान बी-2, थाना कोतवाली नगर, बिजनौर बताया गया है. पांचवीं आरोपी प्रीति पुत्री वीरेंद्र, पत्नी अंकित है, जो कोतवाली नगर, बिजनौर की निवासी बताई गई है. पुलिस इन सभी से पूछताछ कर कथित गिरोह के दूसरे सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है.
5 गिरफ्तारियों के बाद भी जारी है जांच
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ के साथ दस्तावेजों, शिकायतों, पहले दर्ज मुकदमों और अदालत में दाखिल किए गए परिवादों की भी जांच की जा रही है. जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि लोगों की निजी जानकारी कौन जुटाता था, संभावित पीड़ितों से संपर्क कैसे किया जाता था और पैसों की मांग के बाद कथित तौर पर मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती थी. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय थे और अलग-अलग मामलों में उनकी भूमिका क्या रही. बिजनौर पुलिस का कहना है कि विवेचना जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले हर तथ्य व साक्ष्य का परीक्षण किया जा रहा है. यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.
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