Alankar Agnihotri News: बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री और यूपी सरकार के बीच की जंग अब निलंबन तक पहुंच गई है. प्रयागराज के माघ मेला में संतों के अपमान और UGC के नियम में सवर्णों के हितों का मुद्दा उठाकर इस्तीफा देने वाले अलंकार को इस्तीफे के बाद निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई उनके द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच की गई है. साथ ही उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं. ऐसे में अब अलंकार अग्निहोत्री का रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशासन उन्हें सस्पेंड करने की साजिश पहले से ही रच रहा था. उन्होंने दावा किया कि डीएम आवास पर हुई मुलाकात के दौरान लखनऊ से आए एक कॉल में उन्हें जातिगत रूप से अपमानित किया गया.
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'इस्तीफा दे चुका हूं अब जो करना है करें'
अलंकार अग्निहोत्री से जब उन्हें सस्पेंड करने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि 'मैं तो पहले ही अपना इस्तीफा दे चुका हूं. उसके बाद आप सस्पेंड करें या कोई और कार्रवाई मुझे इस पर कोई कमेंट नहीं करना.' इस दौरान वह अपने स्टैंड पर भी कायम रहे. उन्होंने कहा कि वह किसी भी कीमत पर अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे.
इस दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने एक बार फिर से उनकी और डीएम के साथ हुई बैठक का जिक्र किया. अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि जब वे डीएम आवास पर थे तब जिलाधिकारी के फोन पर एक व्यक्ति की आवाज स्पीकर पर सुनाई दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि फोन पर कहा गया कि '**** पंडित पागल हो गया है,इसे रात भर बैठा के रखो.'अब इसे लेकर अलंकार ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की जाए. उन्होंने कहा कि उस व्यक्ति का चेहरा उजागर होना चाहिए जिसने ब्राह्मण समाज के प्रति इतना दुराभाव दिखाया.
वहीं जब अलंकार अग्निहोत्री से कहा गया कि उनके सभी आरोपों को एडीएम देश दीपक ने गलत बताया है. इसपर उन्होंने कहा कि 'एडीएम न्यायिक तो वही बोलेंगे जो उनके आका कहेंगे. मैं चुनौती देता हूं कि जिलाधिकारी के फोन की कॉल डिटेल्स ट्रेस कराई जाएं सच सामने आ जाएगा.'अलंकार का दावा है कि डीएम आवास पर उन्हें 3-4 दिन की छुट्टी लेने का प्रलोभन दिया जा रहा था. उन्होंने कहा कि प्रशासन चाहता था कि मैं छुट्टी के लिए लिखित में कुछ दे दूं ताकि वे उसे काम के दबाव का नाम देकर मीडिया में प्रेस नोट जारी कर सकें. जैसे ही मैं कुछ लिखता वे मुझे सस्पेंड कर देते. जब उनकी यह साजिश नाकाम रही तो उन्होंने देर रात सस्पेंशन ऑर्डर जारी किया.' अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि इस्तीफा देना उनका संवैधानिक अधिकार है और किसी से जबरदस्ती काम नहीं कराया जा सकता. उन्होंने कहा कि वे अब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे. ब्राह्मण संगठनों के समर्थन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में इस अपमान के खिलाफ लोग लामबंद हो रहे हैं और वे जल्द ही दोबारा जिलाधिकारी कार्यालय जाकर अपना पक्ष रखेंगे.
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