Barabanki News: तहसील फतेहपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में बुधवार को पशुओं के काटने से घायल 29 मरीज उपचार के लिए पहुंचे. सभी मरीजों का चिकित्सकीय परीक्षण करने के बाद उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगाई गई. अस्पताल प्रशासन के अनुसार इनमें 19 कुत्ते, 7 बंदर, 2 बिल्ली और 1 अन्य पशु के काटने के मामले शामिल हैं. इनमें 9 नए मरीज थे, जबकि शेष पहले से चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम के तहत निर्धारित तिथि पर वैक्सीन की अगली खुराक लगवाने पहुंचे थे.
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सीएचसी फतेहपुर के चिकित्सा अधिकारी डॉ. निसार अहमद ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन पशुओं के काटने के मरीज पहुंचते हैं. प्रत्येक मरीज का पहले चिकित्सकीय परीक्षण किया जाता है और फिर स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है. आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को आगे की चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है.
उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता, बंदर, बिल्ली या कोई अन्य संदिग्ध जानवर काट ले तो सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए.
इसके बाद बिना चिकित्सकीय सलाह के घाव पर तेल, मिट्टी, हल्दी, मिर्च या अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाने चाहिए. घायल व्यक्ति को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए.
डॉ. निसार अहमद ने कहा कि रेबीज एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार और पूरा टीकाकरण कराने से इससे प्रभावी बचाव संभव है. उन्होंने लोगों से झाड़-फूंक और अंधविश्वास से बचने तथा किसी भी पशु के काटने की घटना को हल्के में न लेने की अपील की.
उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में अब एंटी रेबीज मरीजों की संख्या में कमी आई है. कुछ समय पहले सीएचसी फतेहपुर में प्रतिदिन 50 से 100 मरीज तक एंटी रेबीज टीका लगवाने पहुंचते थे, लेकिन लोगों में बढ़ती जागरूकता और समय पर उपचार के कारण अब यह संख्या घटकर 29 के आसपास रह गई है.
अस्पताल प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी पशु के काटने पर बिना देरी किए नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर उपचार कराएं और डॉक्टर द्वारा बताए गए पूरे टीकाकरण कार्यक्रम का पालन करें. समय पर इलाज ही रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है.
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