बलिया, ग्राम पंचायत हल्दीरामपुर में ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर किया सरकारी धन का गबन, जांच के बाद एफआईआर दर्ज

Ballia Corruption News: बलिया के हल्दीरामपुर ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है. जांच में बिना काम कराए करीब 15 लाख रुपये के भुगतान की पुष्टि होने के बाद पूर्व प्रधान और दो पंचायत सचिवों पर एफआईआर दर्ज की गई है.

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Newzo

10 Jun 2026 (अपडेटेड: 10 Jun 2026, 03:31 PM)

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Ballia Corruption News: उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के विकास खण्ड सियर अंतर्गत ग्राम पंचायत हल्दीरामपुर में वित्तीय अनियमितताओं संबंधी शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि ग्राम पंचायत के प्रधान द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों के साथ मिलीभगत कर बिना कार्य कराए ही विभिन्न मदों में भुगतान कर दिया गया है.

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क्या है पूरा मामला?

प्रकरण की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह द्वारा सहायक निदेशक, मत्स्य विभाग की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित कर जांच कराई गई. इसके अतिरिक्त, उप लोकायुक्त के समक्ष प्रस्तुत शिकायत के क्रम में पृथक रूप से जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी द्वारा भी जांच संपादित की गई.

जांच में क्या सामने आया?

दोनों जांचों में यह तथ्य प्रकाश में आया कि ग्राम पंचायत में लगभग ₹15 लाख की धनराशि का भुगतान बिना कार्य कराए ही कर दिया गया था. जांच रिपोर्टों में तत्कालीन प्रधान एवं संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों को उक्त वित्तीय अनियमितता के लिए पूर्णतः उत्तरदायी पाया गया.

जांच निष्कर्षों के आधार पर जिलाधिकारी के अनुमोदन उपरांत तत्कालीन प्रधान (वर्तमान प्रशासक) अनंत देव सिंह तथा तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव श्री उपेन्द्र और मनोज कुमार के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत थाना उभांव में एफआईआर दर्ज कराई गई है.


प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?

इसके अतिरिक्त, संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही भी पृथक रूप से प्रारंभ की जा रही है. जिला प्रशासन वित्तीय अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार के मामलों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति पर कार्य कर रहा है तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए बड़ी सरकारी धनराशि मिलती है. ऐसे में धन के दुरुपयोग के आरोप गंभीर माने जाते हैं. हल्दीरामपुर मामले में दो अलग-अलग जांचों में अनियमितताओं की पुष्टि के बाद एफआईआर दर्ज हुई है, जिससे भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन के सख्त रुख का संकेत मिलता है.