अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें 32 वर्षों से जानते हैं और उनकी ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि चंपत राय से एक बड़ी लापरवाही हुई, क्योंकि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को ड्राइवर रखा (टिन्नू यादव), जिसने पूरे सिस्टम तक पहुंच बना ली थी. गोविंद देव गिरी ने आशंका जताई कि पूरे मामले के पीछे ड्राइवर और उसके बाहरी संपर्कों की भूमिका हो सकती है.
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'चंपत राय बेगुनाह हैं, लेकिन लापरवाही हुई'
गोविंद देव गिरी ने कहा, "जब मैं कहता हूं कि वह बेगुनाह हैं, तो मेरा मतलब है कि इस पूरे स्कैंडल में उनका कोई निजी हाथ नहीं हो सकता. मैं उन्हें 32 साल से जानता हूं, इसलिए सोच भी नहीं सकता कि वह ऐसी किसी चीज में शामिल हो सकते हैं. उनकी ईमानदारी पर कोई शक नहीं है."
उन्होंने आगे कहा कि यह जरूर माना जाना चाहिए कि चंपत राय अपने काम को लेकर लापरवाह रहे. उनके अनुसार, जिस व्यक्ति को ड्राइवर रखा गया था, उसके पास चाबियां थीं और वह कई व्यवस्थाओं को नियंत्रित करता था.
'ड्राइवर ने किया पूरा खेल'
कोषाध्यक्ष ने कहा कि उन्हें शक है कि पूरा घटनाक्रम ड्राइवर ने अंजाम दिया. उन्होंने यह भी आशंका जताई कि ड्राइवर के बाहरी लोगों से भी संपर्क हो सकते हैं और संभव है कि किसी ने उसे ऐसा करने के लिए उकसाया हो.
गोविंद देव गिरी ने कहा कि उन्हें कई बार लगता है कि यह पूरा मामला किसी बड़ी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है.
पहले लीक हुआ था चंपत राय का कथित बयान
इससे पहले एसआईटी को दिए गए चंपत राय के कथित गोपनीय लिखित बयान का हिस्सा सामने आने का दावा किया गया था. उस कथित बयान में उन्होंने दानपात्रों से निकली नकदी की गिनती, उसकी सुरक्षा, बैंक में जमा कराने की व्यवस्था और बैंक के साथ हुए एमओयू से खुद को अलग बताया था. उन्होंने यह भी कहा था कि संबंधित एमओयू पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं.
अनिल मिश्रा की भूमिका पर भी उठे सवाल
कथित बयान सामने आने के बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि संबंधित एमओयू पर उनके हस्ताक्षर हैं. सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने उन्हें नोटिस भेजा है और उनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है. हालांकि इस संबंध में जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है.
खुला पत्र जारी कर रख चुके हैं अपना पक्ष
इससे पहले चंपत राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रामभक्तों के नाम एक खुला पत्र जारी कर अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया था. उन्होंने कहा था कि वह पिछले 41 वर्षों से प्रचारक जीवन में हैं और 1991 से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए हैं. साथ ही उन्होंने उचित समय आने पर सभी आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने की बात कही थी.
फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है और अब सभी की नजर उसकी अंतिम रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है.
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