Ajay Rai controversy: उत्तर प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या आगमन पर विवाद खड़ा हो गया है. अयोध्या में उनके आगमन पर स्वागत समारोह रखा गया था, जिसमें 'मछली भोज' का आयोजन किया गया. यह भोज हनुमानगढ़ी के पास अर्पित मैरिज लॉन में रखा गया था. जिसे लेकर स्थानीय संतों और श्रद्धालुओं में काफी गुस्सा है. सावन के पवित्र महीने में हुए इस आयोजन को संतों ने सनातन धर्म को अपमान बताया है. तो वहीं, कार्यक्रम के आयोजक ने इसे अपना सांस्कृतिक अधिकार और भोजन की स्वतंत्रता बताया है.
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अयोध्या में कांग्रेस का स्वागत समारोह
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजपाल गौतम, राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश प्रताप सिंह और पूर्वांचल प्रभारी अभिषेक दत्त के तारुन पहुंचने पर यह स्वागत कार्यक्रम रखा गया था. इस कार्यक्रम का आयोजन हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए नए नेता राम निहाल निषाद ने किया था. यह कार्यक्रम हनुमानगढ़ी के पास कांवड़ मार्ग पर स्थित अर्पित मैरिज लॉन में आयोजित किया गया.
सावन में मछली भोज पर बवाल
इस कार्यक्रम के दौरान मछली पकाए जाने का एक वीडियो सामने आया है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि भारी बारिश के बीच कुछ लोग मछलियां बटोर रहे हैं. सावन के पवित्र महीने में और कांवड़ मार्ग के पास इस तरह के मछली भोज के आयोजन को लेकर लोगों ने कांग्रेस पर धार्मिक आस्था से खिलवाड़ को लेकर आपत्ति जताई है.
संतों ने बताया सनातन का अपमान
अयोध्या के संतों ने इस मछली भोज को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. संत सीताराम दास ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि अजय राय ने सावन के पवित्र महीने में अयोध्या आकर मछली भोज किया है, 'जो सनातन धर्म का सीधा अपमान है.' उन्होंने कहा कि कांवड़ मार्ग पर ऐसा आयोजन करके कांग्रेस पार्टी ने कांवड़ियों और समस्त सनातनियों की भावनाओं को बहुत ठेस पहुंचाई है.
आयोजक ने दिया स्वतंत्रता का हवाला
इस पूरे विवाद के बीच कार्यक्रम के आयोजक राम निहाल निषाद ने भी अपना पक्ष रखा है. उन्होंने कहा कि संविधान लागू होने के बाद हर नागरिक को अपनी पसंद का भोजन करने की पूरी आजादी है. उन्होंने निषाद समाज की परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि मछली पकड़ना और खाना उनके समाज की संस्कृति और अधिकार का एक अहम हिस्सा है. सावन या भादों के नाम पर किसी के खान-पान पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए.
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