Amethi Railway Station: उत्तर प्रदेश के अमेठी रेलवे स्टेशन से सिस्टम की बेरुखी का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है. यहां दानापुर से दिल्ली जा रही जनसाधारण एक्सप्रेस में सुबह करीब 6 बजे एक बुजुर्ग का शव मिला था. जीआरपी (GRP) ने शव को ट्रेन से उतारकर अमेठी के सरकारी अस्पताल (CHC) पहुंचा दिया. लेकिन इसके बाद 'यह हमारा क्षेत्र नहीं है' का हवाला देकर स्थानीय पुलिस और जीआरपी दोनों अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे. इस संवेदनहीनता के कारण बुजुर्ग का शव 9 घंटे तक चिलचिलाती धूप में लावारिस पड़ा रहा.
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पुलिस-GRP का सीमा विवाद
अस्पताल में डॉक्टरों ने बुजुर्ग को मृत घोषित कर सुबह करीब पौने आठ बजे तक स्थानीय थाने को मेमो भेज दिया था, लेकिन पुलिस ने इसे रिसीव नहीं किया. वहीं, जीआरपी चौकी प्रभारी किशन कुमार और प्रतापगढ़ के जीआरपी हेड ने भी इसे सिविल पुलिस का मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया.
9 घंटे धूप में पड़ा शव
स्थानीय पुलिस और जीआरपी के बीच हुए इस अमानवीय सीमा विवाद का खामियाजा मृतक को भुगतना पड़ा. अस्पताल के प्रभारी डॉ. सौरभ सिंह के लगातार मेमो और कॉल करने के बावजूद किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली. इस खींचातानी में बुजुर्ग का शव भीषण गर्मी में 9 घंटे तक खुले आसमान के नीचे पड़ा रहा, जिससे उसमें सूजन और दुर्गंध आने लगी.
मीडिया के दखल से कार्रवाई
इस पूरी संवेदनहीनता और सिस्टम की लापरवाही का पर्दाफाश तब हुआ, जब मीडिया की टीम अस्पताल पहुंची और इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. मीडिया के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार अमेठी की स्थानीय पुलिस हरकत में आई. पुलिस ने आनन-फानन में शव के पंचनामे की कागजी कार्रवाई पूरी की और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.
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