Ram Mandir Donation Controversy: रामनगरी अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी और रामशिलाओं की कथित चोरी के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है. इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कारसेवक संतोष दुबे की हो रही है, जिन्होंने राम जन्मभूमि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संतोष दुबे ने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर भी दी है और दावा किया है कि चढ़ावे के साथ-साथ करोड़ों की 1250 बेशकीमती रामशिलाएं भी 2002 में ही गायब हो गई थीं. अपनी जान को खतरा बताते हुए संतोष दुबे ने कहा है कि या तो चोर जेल जाएंगे या फिर वो खुद मृत्यु को प्राप्त होंगे.
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कौन हैं कारसेवक संतोष दुबे?
संतोष दुबे राम जन्मभूमि आंदोलन के सबसे चर्चित चेहरों में से एक हैं. 16 साल की उम्र में इस आंदोलन से जुड़ने वाले संतोष दुबे के पिता और पूर्व न्यास अध्यक्ष महंत परमहंस रामचंद्र दास के बीच गहरे संबंध थे. 1989 में बालासाहेब ठाकरे से मुलाकात के बाद वह शिवसेना से जुड़े और पूर्वी यूपी में संगठन को मजबूत किया. अक्टूबर 1990 में संतोष दुबे हजारों कारसेवकों को पुलिस को चकमा देकर अयोध्या ले गए थे. 2 नवंबर 1990 को हुए गोलीकांड में उन्हें 4 गोलियां लगी थीं, लेकिन वे बाल-बाल बच गए. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी विध्वंस के दौरान बाबरी मस्जिद का गुंबद गिरने से वे करीब 1 महीने तक कोमा में रहे और उनके शरीर की 17 हड्डियां टूट गई थीं.
राजनीतिक सफर और कड़े आरोप
राम मंदिर आंदोलन में अग्रिम पंक्ति में रहने वाले संतोष दुबे ने राजनीति में भी कदम रखा था. 1996 में उन्होंने शिवसेना के टिकट पर बीकापुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2010 में उन्होंने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा था. अब राम मंदिर में दान और रामशिलाओं की कथित चोरी को लेकर वे एक बार फिर मुखर हुए हैं. शंकराचार्य ने भी संतोष दुबे का समर्थन करते हुए कहा है कि, "उसके मन में पीड़ा है... जो कह रहा होगा सच ही कह रहा होगा."
'या तो चोर जेल जाएंगे या मुझे मृत्यु मिलेगी'
एसआईटी (SIT) की जांच पर सवाल उठाते हुए संतोष दुबे ने कहा है कि उन्हें केवल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से ही उम्मीद है. उन्होंने चंपत राय, अनिल मिश्रा और टिन्नू यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी जान को खतरा बताया है. संतोष दुबे ने दृढ़ता से कहा है कि, 'मेरी हत्या करा देंगे, मैं उसके लिए अभी तैयार हूं... हम तो रोज अकेले निकल रहे हैं. लेकिन पोल खोलेंगे चोरों की. उनकी आखिरी सांस तक उनके पीछे लगे रहेंगे. दो में से एक, या तो चंपत राय और उनकी चोर कंपनी जेल जाएगी या तो मुझे मृत्यु मिलेगी.'
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