NEET पेपर लीक के बाद फिर से परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्र, टेलीग्राम बैन पर मिली-जुली राय आई सामने...

NEET Re-Exam: उत्तर प्रदेश में नीट पेपर लीक मामले के बाद छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ रही है. इस दौरान टेलीग्राम बैन को लेकर भी छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है.

यूपी तक

• 11:41 AM • 19 Jun 2026

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NEET Re-Exam: उत्तर प्रदेश में नीट पेपर लीक मामले के बाद छात्रों को एक बार फिर से परीक्षा देने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. जिन अभ्यर्थियों ने महीनों तक दिन-रात मेहनत कर परीक्षा दी थी, उन्हें अचानक उस मेहनत पर सवाल उठने और दोबारा परीक्षा की तैयारी करने की मजबूरी ने मानसिक रूप से झकझोर दिया है. प्रशासन की ओर से इस बार परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई सख्त कदम उठाए गए हैं, लेकिन छात्रों के मन में अब भी असुरक्षा और निराशा बनी हुई है.

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पेपर लीक से बिखरी उम्मीदें 

छात्रों का कहना है कि परीक्षा देने के बाद उन्हें अच्छे परिणाम और मेडिकल कॉलेज में चयन की उम्मीद थी, लेकिन पेपर लीक की खबर ने उनकी पूरी योजना बिगाड़ दी. कई छात्रों ने बताया कि जब उन्होंने यह खबर सुनी कि पेपर लीक हुआ है, तो उन्हें गहरा मानसिक आघात पहुंचा. कुछ छात्रों ने इसे डिप्रेशन और एंग्जायटी का समय बताया, क्योंकि एक साल की मेहनत अचानक बेकार होती नजर आई.

परिवारों पर भी इसका असर पड़ा, जहां माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हो गए. कई छात्रों को दोबारा तैयारी के लिए घर से दूर रहकर कोचिंग सेंटर्स में लौटना पड़ा.

कोचिंग और शिक्षकों ने संभाली तैयारी की कमान

इस कठिन समय में कोचिंग संस्थानों और शिक्षकों ने छात्रों को फिर से मोटिवेट करने और तैयारी में वापस लाने में अहम भूमिका निभाई. छात्रों ने बताया कि लगातार टेस्ट, रिवीजन और गाइडेंस से उन्हें फिर से आत्मविश्वास मिला. कोचिंग सेंटरों में नियमित अभ्यास कराकर छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत किया गया ताकि वे दोबारा परीक्षा का सामना कर सकें.

टेलीग्राम बैन पर छात्रों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

छात्रों के बीच टेलीग्राम बैन को लेकर अलग-अलग राय देखने को मिली. कुछ छात्रों का कहना है कि अगर टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पेपर लीक या अफवाह फैलाने में होता है, तो सरकार का कदम सही है और इसे रोकना जरूरी है.

वहीं दूसरी तरफ छात्रों का यह भी कहना है कि टेलीग्राम उनके लिए पढ़ाई का एक महत्वपूर्ण माध्यम था, जहां वे नोट्स, लेक्चर और स्टडी मटेरियल तुरंत शेयर करते थे. इसके बंद होने से उन्हें पढ़ाई में असुविधा हो रही है और अब उन्हें दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

“हर सिक्के के दो पहलू हैं” - छात्रों की राय

इंटरव्यू में छात्रों ने कहा कि हर फैसले के दो पहलू होते हैं. टेलीग्राम बैन से जहां गलत गतिविधियों पर रोक लग सकती है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों की पढ़ाई और कम्युनिकेशन पर असर पड़ा है. कई छात्रों का मानना है कि समस्या ऐप में नहीं, बल्कि उसके गलत इस्तेमाल में है.

कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि अगर पेपर लीक रोकना है तो केवल प्लेटफॉर्म बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को मजबूत करना होगा और जिम्मेदारी तय करनी होगी.

परीक्षा व्यवस्था और सिस्टम पर उठे सवाल

छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि परीक्षा के दौरान सख्ती तो होती है, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि सिस्टम में कहीं न कहीं बड़ी खामियां मौजूद हैं. छात्रों ने मांग की कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और सख्त मॉनिटरिंग और पारदर्शी प्रक्रिया लागू की जाए.

मध्यम वर्गीय परिवारों पर बढ़ता आर्थिक बोझ

कई छात्रों ने बताया कि वे मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं, जहां दोबारा परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं है. कोचिंग फीस, रहने-खाने का खर्च और बार-बार परीक्षा देने का दबाव उनके परिवारों के लिए आर्थिक रूप से भारी पड़ रहा है. कुछ छात्रों के माता-पिता मजदूरी या छोटे व्यवसाय से जुड़े हैं, जिससे यह बोझ और बढ़ जाता है.

सभी छात्रों ने एक ही उम्मीद जताई कि इस बार परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से हो. उनका कहना है कि अगर फिर से पेपर लीक जैसी घटनाएं हुईं, तो यह केवल छात्रों की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता होगी. अब छात्र पूरी मेहनत के साथ परीक्षा देने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनके मन में अभी भी एक सवाल कायम है कि क्या इस बार उनका भविष्य सुरक्षित रहेगा .