UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच लगातार बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. दोनों नेताओं के बीच चल रही इस तनातनी ने सोशल मीडिया पर भी कई तरह की चर्चाओं और दावों को जन्म दे दिया है.
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राजभर का हमला और सपा पर “बड़े खेला” का दावा
ओम प्रकाश राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमलावर नजर आ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि सपा के कई सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा का फोकस बंगाल नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश होना चाहिए, क्योंकि यहां बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है. उनके इन बयानों पर अखिलेश यादव की ओर से भी तीखा पलटवार देखने को मिला.
सोशल मीडिया पर फैली मुलाकात की अफवाहें
इसी बीच सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से वायरल होने लगा कि ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने अखिलेश यादव से मुलाकात की है और यहां तक कहा कि उन्होंने माफी भी मांगी है तथा सपा में शामिल होने की इच्छा जताई है.
कुछ पोस्ट और एडिटेड तस्वीरों में यह भी दिखाया गया कि राजभर के दोनों बेटे अखिलेश यादव के सामने हाथ जोड़कर खड़े हैं. हालांकि बाद में इसे लेकर कई लोगों ने इसे फर्जी और साजिश बताया.
सपा प्रवक्ता का बड़ा बयान
इस पूरे मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने सोशल मीडिया और बयान में दावा किया कि राजभर के बेटे रात के समय अखिलेश यादव से मिले थे और उन्होंने सुभासपा के विलय को लेकर बातचीत की थी.
उन्होंने यहां तक कहा कि ओम प्रकाश राजभर पर दबाव बनाया जा रहा है और वह भाजपा के दबाव में काम कर रहे हैं, जिसके चलते उनके बयान बदलते रहते हैं.
वायरल पोस्ट और एआई तस्वीरों से बढ़ा भ्रम
सोशल मीडिया पर कई तरह की पोस्ट और एआई जनरेटेड तस्वीरें भी वायरल हुईं, जिनमें दावा किया गया कि सपा दफ्तर में राजभर के बेटे पार्टी विलय का प्रस्ताव लेकर पहुंचे थे. इन पोस्टों में राजनीतिक संवाद और तीखे शब्दों के साथ कई काल्पनिक बातें भी साझा की गईं, जिससे भ्रम और बढ़ गया.
राजभर परिवार की सफाई और पलटवार
इन सभी दावों के बीच ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने सामने आकर इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने इसे एक साजिश बताया और कहा कि समाजवादी पार्टी टूटने की कगार पर है और उनके कई सांसदों से संपर्क में होने की बात भी दोहराई.
सियासी बयानबाज़ी का नया दौर
इस पूरे विवाद के बीच दोनों पक्षों की ओर से लगातार आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. एक तरफ सपा खेमे से राजभर पर दबाव और अंदरूनी राजनीतिक बातचीत के दावे किए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सुभासपा खेमे से सपा पर टूटने और कमजोर होने के आरोप लगाए जा रहे हैं.
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