पूर्वांचल की सियासत में 'राजभर परिवार' का बड़ा दांव! बेटे अरुण राजभर के लिए चुनी सपा के गढ़ वाली सीट, आजमगढ़ से मचेगा हड़कंप?

पूर्वांचल की राजनीति में ओम प्रकाश राजभर के बेटों अरविंद और अरुण राजभर की चर्चा तेज. क्या सपा के गढ़ अतरौलिया से अरुण राजभर लड़ेंगे चुनाव, आजमगढ़ की 10 सीटों पर सुभासपा की नजर.

यूपी तक

• 04:08 PM • 17 Jun 2026

follow google news

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में चुनावी बिगुल बजने से पहले ही राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया ओम प्रकाश राजभर के परिवार को लेकर इस वक्त कयासों का दौर बेहद तेज है. राजभर अपने दोनों बेटों अरविंद राजभर और अरुण राजभर को पूर्वांचल की राजनीति में मजबूती से स्थापित करने के लिए एक बड़ा सियासी चक्रव्यूह रच रहे हैं. इसी कड़ी में उनके छोटे बेटे अरुण राजभर की आजमगढ़ की एक चर्चित सीट से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है.

यह भी पढ़ें...

सपा के मजबूत गढ़ अतरौलिया से ताल ठोकेंगे अरुण राजभर!

सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अरुण राजभर अब चुनावी राजनीति के मुख्य मंच पर उतरने जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, राजभर परिवार ने अरुण के लिए आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट को चुना है. अरुण राजभर की इस एंट्री से अतरौलिया का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है, क्योंकि यह सीट परंपरागत रूप से समाजवादी पार्टी (सपा) का मजबूत गढ़ मानी जाती है और वर्तमान में यहां से सपा के संग्राम यादव विधायक हैं. सपा के इस अभेद्य किले में सेंध लगाने के लिए ओम प्रकाश राजभर और उनके बेटे ने अभी से पूरी ताकत झोंक दी है.

अरविंद राजभर की 'जीत' की तलाश और आजमगढ़ पर नजर

राजभर परिवार की नजरें सिर्फ अतरौलिया पर ही नहीं, बल्कि आजमगढ़ जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर टिकी हुई हैं. यह पूरा क्षेत्र जातीय और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और वीआईपी माना जाता है, जहां यादव, मुस्लिम, राजपूत और ब्राह्मण मतदाताओं की तादाद हार-जीत तय करती है.

दूसरी तरफ, ओम प्रकाश राजभर के बड़े बेटे अरविंद राजभर के लिए भी यह साख की लड़ाई है. अरविंद इससे पहले घोसी और शिवपुर जैसी सीटों से किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिल सकी. घोसी में उन्हें सपा के राजीव राय से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी. ऐसे में राजभर परिवार अपने पुराने सियासी कड़वे अनुभवों को पीछे छोड़कर इस बार एक नई और आक्रामक रणनीति पर काम कर रहा है.

क्या पूर्वांचल में इतिहास बदल पाएगा राजभर परिवार?

भले ही अतीत में ओम प्रकाश राजभर के बेटों को चुनावी मैदान में हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन इस बार का सियासी संघर्ष बिल्कुल अलग है. अतरौलिया और आजमगढ़ के अन्य हिस्सों में मजबूत प्रदर्शन करने के लिए सुभासपा ने जमीनी स्तर पर कैडर को एक्टिव कर दिया है.