Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमी मंदिर में चंदे और चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. मामले की जांच के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया जा चुका है, लेकिन अब तक इस संबंध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है. इसी वजह से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. मंदिर परिसर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद कथित चोरी कैसे हुई, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है. वहीं सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ और रिकॉर्डिंग हटाए जाने के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है.
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आरोपों के बाद शुरू हुई जांच
राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मुद्दा तब चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि मंदिर में आने वाले चंदे और चढ़ावे में गड़बड़ी हो रही है. उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर से जुड़े दो गुटों के बीच इस कथित धनराशि के बंटवारे को लेकर विवाद चल रहा है.
इन आरोपों के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया. शुरुआत में भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि राम भक्तों और कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले लोगों को राम मंदिर पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है. हालांकि बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया.
मुख्यमंत्री योगी का बड़ा दावा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगले 15 दिनों में "दूध का दूध और पानी का पानी" हो जाएगा. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच निष्पक्ष होगी और यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कुछ लोग अयोध्या और राम मंदिर की छवि को खराब करने की साजिश कर रहे हैं.
CCTV फुटेज पर उठे बड़े सवाल
पूरे विवाद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा सीसीटीवी कैमरों को लेकर हो रही है. आरोप लगाए जा रहे हैं कि मंदिर परिसर में लगे कुछ कैमरों के फुटेज के साथ छेड़छाड़ की गई है और कुछ रिकॉर्डिंग हटाई भी गई हैं. इसी मुद्दे पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने महत्वपूर्ण बयान दिया है.
उन्होंने कहा कि पूरे मंदिर परिसर में लगभग 800 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं और इनकी निगरानी का दायित्व पुलिस के पास है. कैमरों का नियंत्रण कंट्रोल रूम से किया जाता है.
"CCTV लगे थे, लेकिन निगरानी प्रभावी थी या नहीं, यह सवाल है"
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि कैमरे पूरे परिसर में स्थापित हैं और वे काम भी कर रहे थे, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि उनका उपयोग पूरी तरह प्रभावी तरीके से किया गया या नहीं.
जब उनसे पूछा गया कि क्या सीसीटीवी से छेड़छाड़ हुई है, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि इसका विश्लेषण किया जाना अभी बाकी है. उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल किसी असामान्य घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि यदि कथित चोरी का पता सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चला है, तो यह भी जांच का विषय है कि निगरानी प्रणाली कितनी प्रभावी थी.
अभी भी "कथित चोरी" मान रहा है प्रशासन
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस मामले को "कथित चोरी" के रूप में देखा जा रहा है. उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि वास्तव में मंदिर परिसर के अंदर क्या हुआ था और आरोपों में कितनी सच्चाई है.
FIR नहीं होने पर उठ रहे सवाल
मामले में एसआईटी का गठन होने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं. आम लोगों और राजनीतिक दलों के बीच यह चर्चा है कि यदि चोरी के आरोप इतने गंभीर हैं तो औपचारिक प्राथमिकी क्यों दर्ज नहीं कराई गई. कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईटी की जांच और उसके निष्कर्ष आने के बाद ही आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा.
कई किरदार जांच के घेरे में
मंदिर परिसर में चढ़ावे की व्यवस्था, गिनती प्रक्रिया, सुरक्षा निगरानी और प्रशासनिक प्रबंधन से जुड़े कई लोगों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है.
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