Ram Mandir Donation Controversy: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला लगातार गरमाता जा रहा है. अखिलेश यादव के आरोपों और सीएम योगी द्वारा एसआईटी (SIT) गठन के बाद अब इस मामले में एक बड़ा बयान सामने आया है. राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने 'इंडिया टुडे ग्रुप' से बातचीत में मंदिर ट्रस्ट के मौजूदा प्रबंधन पर कई सवाल खड़े किए हैं और इसे पूरी तरह से अनौपचारिक बताया है. उन्होंने इस व्यवस्था को तुरंत एक औपचारिक ढांचे में ढालने की वकालत की है.
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बिना लिखित आदेश के कामकाज
नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर के प्रबंधन ढांचे को लेकर कहा कि ट्रस्ट में किसी की कोई लिखित जिम्मेदारी या जवाबदेही (Accountability) तय नहीं है. वर्तमान में काम का कोई औपचारिक बंटवारा (Division of Work) नहीं है. उन्होंने बताया कि परिसर एक 'मिनी सिटी' बन चुका है, जहां लगभग 1500 लोग काम कर रहे हैं. इनमें से अधिकांश स्वयंसेवक हैं, जिन्हें बिना किसी लिखित आदेश के केवल अनौपचारिक ढंग से काम बता दिया गया है, जो कि प्रबंधन की एक बड़ी खामी है.
अनुभवी हाथों में हो प्रबंधन
निर्माण समिति के अध्यक्ष का स्पष्ट मानना है कि इतने बड़े परिसर का प्रबंधन अब अनुभवी लोगों के हाथों में सौंपा जाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि एक फॉर्मल एडमिनिस्ट्रेशन (औपचारिक प्रशासन) बनाया जाए, जिसमें कर्मचारियों का पदानुक्रम (Hierarchy) तय हो, बाकायदा वेतन मिले और काम के लिए एक नियमावली (Manual) बनाई जाए. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि वह मंदिर को सरकारी नियंत्रण में देने की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि सिर्फ व्यवस्था को स्ट्रक्चर में लाने की बात कह रहे हैं.
SIT कर रही मामले की जांच
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी होने का गंभीर आरोप लगाया था. इन आरोपों के सामने आने के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल प्रभाव से एक एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया, जो अब इस मामले की गहनता से जांच कर रही है. हालांकि, प्रशासन की तरफ से अभी तक इस मामले में किसी के ऊपर कोई एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की गई है.
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