Amethi News: अमेठी कस्बे में संचालित प्रकाश गैस एजेंसी पर सप्लाई विभाग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए बड़ा खुलासा किया है. जांच में कुल 1266 गैस सिलेंडरों में भारी अंतर सामने आया है. इसके बाद विभाग की तहरीर पर अमेठी कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
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जानकारी के अनुसार, पूर्ति निरीक्षक अरुण कुमार पाण्डेय ने पूर्ति लिपिक अनिल कुमार के साथ 4 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे एजेंसी के गोदाम का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान गोदाम में मौजूद सिलेंडरों का भौतिक सत्यापन किया गया. मौके पर 14.2 किलो घरेलू 617 सिलेंडर (02 भरे, 613 खाली, 02 दोषपूर्ण), 19 किलो कमर्शियल 109 (सभी खाली), 5 किलो घरेलू 44, 5 किलो कमर्शियल 79 तथा 10 किलो कम्पोजिट 73 सिलेंडर पाए गए.
इसके बाद टीम ने एजेंसी कार्यालय पहुंचकर इंडियन ऑयल के SDMS पोर्टल से स्टॉक का मिलान किया. पोर्टल के अनुसार 14.2 किलो घरेलू 758 (558 भरे, 181 खाली, 19 दोषपूर्ण), 19 किलो कमर्शियल 171, 10 किलो कम्पोजिट 72, 19 किलो एक्स्ट्रा तेज कमर्शियल 180 और 5 किलो सिलेंडर 58 दर्ज थे.
दोनों आंकड़ों के मिलान में चौंकाने वाली गड़बड़ी सामने आई. जांच में पाया गया कि 14.2 किलो के 556 भरे सिलेंडर कम और 432 खाली सिलेंडर अधिक हैं. वहीं 17 दोषपूर्ण सिलेंडर कम पाए गए. 19 किलो कमर्शियल श्रेणी में 30 भरे और 212 खाली सिलेंडर कम, जबकि 10 किलो कम्पोजिट में 9 भरे सिलेंडर कम और 10 खाली अधिक पाए गए. इसके अलावा 5 किलो श्रेणी में 29 भरे सिलेंडर कम मिले.
इस प्रकार कुल मिलाकर 641 भरे सिलेंडर कम और 442 खाली सिलेंडर अधिक पाए गए, जो कुल 1266 सिलेंडरों के गंभीर अंतर को दर्शाता है.
जांच के दौरान एजेंसी कर्मचारियों द्वारा स्टॉक रजिस्टर, डिस्पैच रजिस्टर और डिलीवरी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके. वहीं एजेंसी के प्रोप्राइटर/पार्टनर मनदीप सिंह मौके पर अनुपस्थित मिले.
प्रथम दृष्टया मामला गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और निजी लाभ के लिए दुरुपयोग का माना जा रहा है, जो एलपीजी (प्रदाय एवं वितरण विनियमन) आदेश 2000 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 का उल्लंघन है.
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