UP Police recruitment: यूपी पुलिस उप निरीक्षक (दरोगा) सीधी भर्ती 2025 का परिणाम 7 मई को घोषित किया गया था. रिजल्ट जारी होते ही सोशल मीडिया पर कटऑफ को लेकर कई तरह की चर्चाएं और दावे वायरल होने लगे. इसी बीच एक यूजर राधा पासवान द्वारा भ्रामक जानकारी पोस्ट किए जाने के बाद मामला गंभीर हो गया. भर्ती बोर्ड ने इस पोस्ट को संज्ञान में लेते हुए हुसैनगंज थाने में धारा 221, 292, 319-2, 353/1B और 66 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है. बोर्ड ने स्पष्ट कहा है कि भ्रामक सूचना फैलाने वालों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी.
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सोशल मीडिया पोस्ट और कानूनी कार्रवाई
राधा पासवान ने बाद में अपने पोस्ट को लेकर माफी मांगते हुए कहा कि वह एक गरीब परिवार से हैं और उनका उद्देश्य केवल जानकारी प्राप्त करना था. उन्होंने मुकदमा वापस लेने की अपील भी की है, क्योंकि इससे उनके भविष्य और परिवार पर गंभीर असर पड़ सकता है. हालांकि, इस मामले ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक रंग भी ले लिया है और कुछ अभ्यर्थियों तथा नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना भी की है.
कटऑफ और चयन प्रक्रिया पर सवाल
रिजल्ट के बाद जारी कटऑफ को लेकर भी अभ्यर्थियों में नाराजगी देखने को मिल रही है. जनरल कैटेगरी के लिए 370 अंक, ओबीसी-ईडब्ल्यूएस के लिए 364, एससी के लिए 350 और एसटी के लिए 334 अंक कटऑफ निर्धारित किए गए हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि 160 प्रश्नों में से लगभग 150 सही करने के बावजूद कुछ उम्मीदवारों का चयन विवादों में है, जिससे नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
स्कोर कार्ड और ओएमआर शीट में गड़बड़ी के आरोप
कई अभ्यर्थियों ने शिकायत की है कि प्रश्न पुस्तिका संख्या और ओएमआर शीट में मेल नहीं बैठ रहा है. उनका कहना है कि सभी उम्मीदवारों का स्कोर कार्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे. इस पूरे मामले ने भर्ती आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पहले की भर्तियों का विवाद और बढ़ता अविश्वास
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि 2021 की भर्ती में भी गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे, जिससे आयोग पर भरोसा कम हुआ है. इसी वजह से इस बार भी पारदर्शिता की मांग तेज हो गई है. छात्र चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह साफ-सुथरी और निष्पक्ष हो.
भर्ती बोर्ड की सख्ती और मॉनिटरिंग
भर्ती बोर्ड ने सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर नजर रखना शुरू कर दिया है. बोर्ड का कहना है कि जानबूझकर गलत सूचना फैलाकर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जिस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं, माफी के बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है.
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