प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से एक साल तक सोने की खरीदारी से बचने की अपील का असर अब देश के बड़े सर्राफा बाजारों में दिखाई देने लगा है. खासतौर पर वाराणसी का प्रसिद्ध ठठेरी बाजार, जिसे पूर्वांचल की सबसे बड़ी ज्वेलरी मंडी माना जाता है, इस चर्चा के केंद्र में है. व्यापारियों और कारीगरों का कहना है कि इस अपील से बाजार की गतिविधियों में कुछ गिरावट जरूर आ सकती है, हालांकि शादी-विवाह के सीजन में मांग पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है.
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ठठेरी बाजार में बढ़ी चिंता
वाराणसी का ठठेरी बाजार हजारों व्यापारियों, कारीगरों और मजदूरों की रोजी-रोटी का बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां सोने-चांदी के कारोबार से जुड़े बड़ी संख्या में परिवार निर्भर हैं. ऐसे में पीएम की अपील के बाद बाजार में भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है. व्यापारियों का मानना है कि ग्राहकों के मन में असमंजस की स्थिति बनने से खरीदारी प्रभावित हो सकती है.
10 से 20 फीसदी तक असर की आशंका
स्थानीय कारोबारियों के मुताबिक सोने की खरीद में करीब 10 से 20 प्रतिशत तक गिरावट देखने को मिल सकती है. हालांकि उनका यह भी कहना है कि पूरी तरह से कारोबार ठप होने जैसी स्थिति नहीं बनेगी. विवाह और मांगलिक कार्यक्रमों में सोने की ज्वेलरी की परंपरागत मांग बनी रहेगी, लेकिन लगातार बढ़ते दाम और बाजार की अनिश्चितता से ग्राहक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं.
ग्रामीण इलाकों में ग्राहक कर रहे इंतजार
व्यापारियों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कई लोग सोने के दाम कम होने का इंतजार कर रहे हैं. इसी वजह से खरीदारी में स्थिरता नहीं दिख रही है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा तो आने वाले समय में व्यापार और अधिक प्रभावित हो सकता है.
कारीगरों और मजदूरों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
सोने के कारोबार में गिरावट का सबसे बड़ा प्रभाव छोटे दुकानदारों, कारीगरों और मजदूरों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. ज्वेलरी निर्माण से जुड़े हजारों परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से this उद्योग पर निर्भर हैं. मांग कम होने की स्थिति में रोजगार और आय पर असर पड़ सकता है.
पैनिक बाइंग की भी संभावना
बाजार में कुछ व्यापारियों का यह भी मानना है कि अनिश्चितता के माहौल में पैनिक बाइंग देखने को मिल सकती है. महंगाई और भविष्य की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ लोग सोने को सुरक्षित निवेश मानकर खरीदारी बढ़ा सकते हैं. ऐसे में बाजार में मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है.
भारतीय समाज में सोने का विशेष महत्व
भारत में गोल्ड ज्वेलरी को केवल निवेश नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है. खासकर महिलाओं के लिए सोना संकट के समय सहारा माना जाता है. इतिहास में भी कई मौकों पर महिलाओं ने देशहित में अपने आभूषण दान किए हैं. यही कारण है कि भारतीय परिवारों में सोने की अहमियत आज भी बरकरार है.
व्यापारियों ने सरकार से की राहत की मांग
ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों ने सरकार से मांग की है कि गोल्ड रिसाइक्लिंग पर टैक्स में राहत दी जाए ताकि देश की मुद्रा विदेशों में कम जाए और स्थानीय उद्योग को मजबूती मिले. व्यापारियों का यह भी कहना है कि बड़ी ब्रांडेड कंपनियों पर नियंत्रण जरूरी है, ताकि छोटे कारीगरों और स्थानीय दुकानदारों का कारोबार प्रभावित न हो.
व्यापारियों का मानना है कि यदि सरकार और सर्राफा कारोबारियों के बीच लगातार संवाद बना रहा और जरूरत के अनुसार राहत कदम उठाए गए, तो इस स्थिति को संतुलित किया जा सकता है. इससे हजारों मजदूरों और कारीगरों की आजीविका सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी.
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