UP SI भर्ती 2026 में हाई कटऑफ से भड़के अभ्यर्थी, भर्ती बोर्ड की पारदर्शिता पर भी उठे गंभीर सवाल...क्या है पूरा मामला?

UP Police SI Recruitment 2026: यूपी पुलिस दरोगा भर्ती 2026 की परीक्षा में 92 प्रतिशत से अधिक कट ऑफ आने के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई है. उम्मीदवार स्कोरकार्ड और नॉर्मलाइजेशन डेटा सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं. सोशल मीडिया और विशेषज्ञों ने भी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि जून के तीसरे सप्ताह में पीएसटी, डीवी और फिजिकल टेस्ट प्रस्तावित हैं.

यूपी तक

• 02:12 PM • 11 May 2026

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UP Police SI Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती 2026 को लेकर अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. 14 और 15 मार्च को आयोजित हुई परीक्षा का परिणाम 7 मई को जारी किया गया, लेकिन रिजल्ट के साथ सामने आई ऊंची कट ऑफ ने हजारों उम्मीदवारों को निराश कर दिया है. खासतौर पर अनारक्षित वर्ग के लिए 92 प्रतिशत से अधिक कट ऑफ जाने के बाद सोशल मीडिया से लेकर कोचिंग संस्थानों तक इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है.

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92 प्रतिशत से ज्यादा कट ऑफ ने बढ़ाई अभ्यर्थियों की चिंता

अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा का स्तर अपेक्षाकृत आसान था, लेकिन इतनी अधिक कट ऑफ की उम्मीद किसी ने नहीं की थी. सामान्य वर्ग के लिए 92 प्रतिशत से अधिक कट ऑफ जाने के कारण बड़ी संख्या में उम्मीदवार चयन सूची से बाहर हो गए. कई अभ्यर्थियों का मानना है कि उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन ऊंची कट ऑफ के चलते उनकी मेहनत का सही मूल्यांकन नहीं हो सका.

स्कोरकार्ड और नॉर्मलाइजेशन डेटा सार्वजनिक करने की मांग

रिजल्ट जारी होने के बाद उम्मीदवार भर्ती बोर्ड से स्कोरकार्ड और नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अलग-अलग शिफ्ट में परीक्षा आयोजित होने के कारण अंक निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए. अभ्यर्थियों का आरोप है कि अभी तक उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई कि किस आधार पर नॉर्मलाइजेशन किया गया और अंतिम अंक कैसे तय हुए.

आरक्षित वर्गों में भी असंतोष

ओबीसी, एससी, एसटी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के उम्मीदवारों में भी कट ऑफ को लेकर असंतोष देखने को मिल रहा है. कई छात्रों का कहना है कि इतनी ऊंची कट ऑफ ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया है और इससे उनकी आगामी तैयारियों पर भी नकारात्मक असर पड़ा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार अभ्यर्थी अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं.

विशेषज्ञों ने भी उठाए भर्ती प्रक्रिया पर सवाल

भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई शिक्षकों और विशेषज्ञों ने भी सवाल उठाए हैं. विवेक कुमार समेत कई विशेषज्ञों का कहना है कि चारों शिफ्ट के पेपरों में कठिनाई स्तर समान नहीं था, जिसके कारण नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि फिजिकल टेस्ट और अन्य चरणों में अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है. स्कोरकार्ड जारी न होने से अभ्यर्थी अपनी वास्तविक स्थिति नहीं समझ पा रहे हैं.

जून के तीसरे सप्ताह में हो सकते हैं पीएसटी और फिजिकल टेस्ट

रिपोर्ट के अनुसार, भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण यानी पीएसटी, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फिजिकल टेस्ट जून के तीसरे सप्ताह में आयोजित किए जा सकते हैं. हालांकि कट ऑफ विवाद के चलते अभ्यर्थियों की निगाहें अब भर्ती बोर्ड के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं.

भर्ती बोर्ड ने प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष

दूसरी ओर भर्ती बोर्ड का कहना है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के अनुसार की गई है. बोर्ड के अनुसार पेपर में किसी प्रकार की गड़बड़ी या त्रुटि नहीं हुई है और कट ऑफ मेरिट के आधार पर तय की गई है.

मानसिक दबाव में अभ्यर्थी

उच्च कट ऑफ और अधूरी जानकारी के कारण कई अभ्यर्थी मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है that यदि स्कोरकार्ड और नॉर्मलाइजेशन का पूरा डेटा सार्वजनिक कर दिया जाए तो कई विवाद स्वतः समाप्त हो सकते हैं.

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