लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात सिपाही सुनील शुक्ला के सनसनीखेज वीडियो ने महकमे के भीतर हड़कंप मचा दिया है. आईपीएस अधिकारियों पर वसूली के गंभीर आरोप लगाने वाले इस सिपाही ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई है. यह मामला उस वक्त और अधिक गरमा गया जब सिपाही के घर पर देर रात हुई पुलिसिया छापेमारी को लेकर विपक्षी नेताओं ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया.
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अमेठी के रहने वाले सिपाही सुनील शुक्ला ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर यूपी पुलिस के सिस्टम पर कड़े प्रहार किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में ऊंचे पदों पर बैठे कुछ आईपीएस अधिकारी कथित तौर पर 2-2 हजार रुपये की वसूली के खेल में शामिल हैं. सुनील ने जांच प्रक्रिया पर भी अविश्वास जताते हुए कहा कि जिन लोगों को जांच सौंपी गई है, वे खुद इस व्यवस्था का हिस्सा हैं. सिपाही ने भावुक होते हुए कहा कि वे कोई आतंकवादी या नक्सलवादी नहीं हैं, बल्कि एक साधारण परिवार से आते हैं जिनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनकी पत्नी भी पुलिस विभाग में कार्यरत हैं, फिर भी उन्हें न्याय के लिए भटकना पड़ रहा है.
मामला तब और ज्यादा संवेदनशील हो गया जब सुनील शुक्ला ने अपने तीसरे वीडियो में पुलिस की रात के समय उनके घर पर हुई छापेमारी का जिक्र किया. सुनील के अनुसार, उस वक्त घर में उनकी मां और बहन अकेली थीं, जिससे उनका परिवार काफी डर गया है. इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं. हालांकि, पुलिस प्रशासन का कहना है कि रात में घर जाने का मकसद छापेमारी नहीं बल्कि एक आधिकारिक नोटिस थमाना था.
सुनील शुक्ला ने मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि उन पर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल सच बोल रहे हैं और इसके बदले में उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है. वर्तमान में यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, जहाँ एक तरफ विभाग की साख दांव पर है तो दूसरी तरफ एक सिपाही के सुरक्षा की मांग.
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