Lucknow One District, One Cuisine: लखनऊ में टुंडे कबाब और बिरयानी सूची से बाहर, फिर किसे मिली जगह

Lucknow One District, One Cuisine: यूपी सरकार की 'एक जिला-एक व्यंजन' योजना में लखनऊ के टुंडे कबाब और बिरयानी को जगह नहीं मिली है. योजना में शाकाहारी व्यंजनों जैसे चाट और रेवड़ी को शामिल किया गया है.

यूपी तक

• 06:05 PM • 07 May 2026

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Lucknow One District One Cuisine: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट व्यंजनों को पहचान दिलाने के लिए 'एक जिला-एक व्यंजन' योजना की सूची तैयार की है. लखनऊ के लिए जिन व्यंजनों का चयन किया गया है, उनमें यहां की मशहूर मक्खन मलाई, चाट और रेवड़ी शामिल हैं. हालांकि, इस सूची में लखनऊ की वैश्विक पहचान बन चुके टुंडे कबाब और बिरयानी जैसे नॉन-वेज आइटम शामिल नहीं हैं.

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संस्कृति और स्वाद की पहचान पर छिड़ी बहस

सरकार के इस फैसले पर स्थानीय लोगों और खाने के शौकीनों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया है. कई लोगों का मानना है कि टुंडे कबाब सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि लखनऊ की संस्कृति और विरासत का हिस्सा हैं. देश-विदेश से आने वाले पर्यटक और बॉलीवुड हस्तियां खास तौर पर पुराने लखनऊ के कबाबों का स्वाद लेने पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों का तर्क है कि लखनऊ की 'गंगा-जमुनी' तहजीब में शाकाहारी और मांसाहारी दोनों व्यंजनों का समान महत्व है, ऐसे में टुंडे कबाब और बिरयानी को सूची में शामिल किया जाना चाहिए था.

अन्य जिलों की स्थिति

लखनऊ ही नहीं, प्रदेश के अन्य जिलों की सूची में भी शाकाहारी व्यंजनों को ही प्राथमिकता दी गई है:

  • अयोध्या: कचौड़ी-समोसा
  • बरेली: छोले-भटूरे
  • जौनपुर: मिठाइयां (इमरती)

युवाओं और विशेषज्ञों की मांग

शहर के युवाओं और फूड ब्लॉगर्स का कहना है कि लखनऊ के खानपान को दुनिया भर में लोकप्रियता इसके मांसाहारी व्यंजनों की वजह से भी मिली है. कबाब की गलियों के बिना लखनऊ का फूड टूर अधूरा माना जाता है. ऐसे में मांग की जा रही है कि भविष्य में इस योजना का विस्तार करते हुए इन लोकप्रिय व्यंजनों को भी आधिकारिक पहचान दी जाए.

क्या बदल सकती है सूची?

फिलहाल सरकार ने यह निर्णय जिला स्तर पर प्राप्त सुझावों के आधार पर लिया है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि 'एक जिला-एक उत्पाद' (ODOP) की तरह इस योजना में भी समय-समय पर संशोधन और नए व्यंजनों को जोड़ने की संभावना बनी रहती है. अब देखना यह होगा कि क्या जनता की मांग पर टुंडे कबाब और बिरयानी को इस फेहरिस्त में शामिल किया जाता है या नहीं.