OP Rajbhar Attack on Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों और वहां के बदलते सियासी समीकरणों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने ममता बनर्जी और विपक्षी गठबंधन पर जमकर निशाना साधा है. राजभर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भ्रष्टाचार से लेकर 'सॉफ्ट हिंदुत्व' तक के मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी.
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कोयला घोटाले और वित्तीय संकट का दावा
राजभर ने ममता सरकार की घेराबंदी करते हुए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए:
- पैसे की कमी: राजभर ने कहा कि ममता सरकार के दौरान कोयला घोटाले के जरिए खूब पैसा बनाया गया, लेकिन अब सरकार बदलने की आहट और सत्ता खिसकने के बाद बंगाल में फंड का संकट खड़ा हो गया है.
- बदली परिस्थितियां: उन्होंने दावा किया कि भ्रष्टाचार के रास्तों के बंद होने से टीएमसी के भीतर घबराहट है और यही वजह है कि सरकार अब वित्तीय रूप से कमजोर पड़ रही है.
विपक्ष की 'दहशत' और क्षेत्रीय रणनीति
विपक्षी खेमे में मची भगदड़ पर टिप्पणी करते हुए राजभर ने कहा:
- कमजोर संगठन: विपक्ष की हालत पस्त है और उन्हें सत्ता में वापसी का कोई मौका नजर नहीं आ रहा. इसी हताशा में नेता पार्टियां छोड़ रहे हैं.
- संगठनात्मक बदलाव: उन्होंने क्षेत्रीय अध्यक्षों की नियुक्ति को संगठन की कमजोरी छिपाने और उसे मजबूत करने की एक असफल कोशिश करार दिया.
सॉफ्ट हिंदुत्व और हनुमान चालीसा पर तंज
ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के बदलते रुख पर कटाक्ष करते हुए राजभर ने कहा:
- बदला मिजाज: जो नेता पहले मंदिर जाने से कतराते थे, वे अब हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं. राजभर ने इसे महज चुनावी दिखावा बताया.
- ज्योतिष और सच: अखिलेश यादव द्वारा ज्योतिष की सलाह लेने की चर्चाओं पर उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि ज्योतिष से ज्यादा जरूरी 'सच' बोलना है.
पिछड़ों की लड़ाई और अपना जनाधार
राजभर ने स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति का मूल आधार पिछड़ों का हक है:
- जारी है संघर्ष: पिछड़ों और वंचित वर्गों के सम्मान की लड़ाई वे लगातार लड़ रहे हैं और इसे लेकर पूरी तरह गंभीर हैं.
- ताकत का अहसास: उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि जनता के बीच उनका जनाधार सबसे मजबूत है और आगामी चुनावों में वे अपनी असली ताकत साबित करके दिखाएंगे.
ममता बनर्जी की हार के बाद बदलते राष्ट्रीय समीकरणों ने यूपी के नेताओं को अपनी रणनीति पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है. राजभर का यह हमला दर्शाता है कि आगामी दिनों में राजनीतिक गठजोड़ और विरोध की धार और तेज होने वाली है.
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