उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी के खेमे से बड़ी खबर सामने आ रही है. पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनाव प्रबंधन और रणनीतिक सलाह देने वाली कंपनी आईपैक (I-PAC) के साथ अपना अनुबंध खत्म कर दिया है.
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क्यों टूटा आईपैक और सपा का साथ?
दोनों के बीच संबंध टूटने के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण माने जा रहे हैं:
- फंडिंग की कमी: सूत्रों के मुताबिक, यूपी में फंडिंग की कमी और बजट आवंटन को लेकर आ रही समस्याओं के कारण यह समझौता आगे नहीं बढ़ सका.
- रणनीतिक मतभेद: बंगाल चुनाव के बाद बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों और रणनीतियों को लेकर भी आपसी सहमति नहीं बन पा रही थी.
- नया दृष्टिकोण: अखिलेश यादव अब आगामी चुनौतियों के लिए नई और अधिक मजबूत एजेंसियों के साथ काम करना चाहते हैं, जो सोशल मीडिया और जमीनी सर्वे में विशेषज्ञ हों.
प्रशांत किशोर की कंपनी और सपा का अनुबंध
आईपैक, जिसकी स्थापना प्रशांत किशोर ने की थी, बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनावी सफलता का हिस्सा रही है. उत्तर प्रदेश में भी इसे 2027 के लिए बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की सलाह के बाद अब पार्टी ने अपनी राहें अलग कर ली हैं.
2027 के लिए 'प्लान-बी' तैयार
सपा अब पेशेवर कंपनियों के साथ नए सिरे से संपर्क साध रही है:
- सर्वे और सोशल मीडिया: पार्टी अब ऐसी कंपनियों को प्राथमिकता दे रही है जो डेटा विश्लेषण और डिजिटल प्रचार में माहिर हों.
- संगठनात्मक सहयोग: इस नई चुनावी तैयारी में पार्टी के विधायक और प्रदेश अध्यक्ष भी सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं, ताकि प्रचार को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया जा सके.
समाजवादी पार्टी का यह कदम स्पष्ट करता है कि वह 2027 के चुनावों के लिए किसी भी स्तर पर जोखिम नहीं उठाना चाहती और एक नई ऊर्जा के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है.
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