NEET 2026 Result: नीट 2026 के नतीजों में उत्तर प्रदेश के वाराणसी के रहने वाले आर्यन दुबे ने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है. आर्यन ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश में टॉप किया है, बल्कि ऑल इंडिया रैंक में सातवां स्थान हासिल किया है. नीट जैसी कठिन परीक्षा में इतनी बड़ी सफलता हासिल करने वाले आर्यन ने अपनी तैयारी, स्ट्रेटजी और संघर्ष को लेकर खास बातचीत की.
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आर्यन ने बताया कि नीट परीक्षा इस बार काफी चर्चा में रही थी. पहले पेपर लीक के आरोपों और फिर री-एग्जाम को लेकर छात्रों के बीच काफी तनाव का माहौल था. उन्होंने कहा कि जब पहली बार परीक्षा हुई थी तो उनके करीब 715 अंक आ रहे थे. दो साल की मेहनत के बाद अच्छे नंबर आने पर आत्मविश्वास बढ़ गया था, लेकिन जब परीक्षा दोबारा कराने का फैसला हुआ तो कुछ समय के लिए मनोबल जरूर टूट गया था. उन्होंने बताया कि दोबारा परीक्षा की खबर सुनकर चिंता हुई कि पता नहीं अगली बार पेपर कैसा आएगा और क्या पहले जैसा प्रदर्शन कर पाएंगे या नहीं. हालांकि, माता-पिता और शिक्षकों ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें समझाया कि जो चीजें उनके नियंत्रण में हैं, उन पर ध्यान देना चाहिए. इसके बाद उन्होंने दोबारा उसी टाइम टेबल के साथ तैयारी शुरू कर दी.
रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई का बनाया शेड्यूल
आर्यन ने बताया कि नीट की तैयारी के दौरान उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे तक पढ़ाई की. उनका फोकस एक तय टाइम टेबल के अनुसार पढ़ाई करने पर रहा. उन्होंने कहा कि अगर समय पहले से तय हो तो पढ़ाई को टालने की संभावना कम हो जाती है.
उन्होंने बताया कि कोचिंग या स्कूल जाने से पहले करीब डेढ़ घंटे पढ़ाई करते थे और वापस आने के बाद कई घंटे तक रिवीजन और सवालों की प्रैक्टिस करते थे. बायोलॉजी के लिए उन्होंने एनसीईआरटी को बार-बार पढ़ा और हर चैप्टर को कई बार रिवाइज किया.
"जितनी बार रिवीजन करेंगे, उतना बेहतर स्कोर आएगा"
आर्यन ने नीट की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह देते हुए कहा कि इस परीक्षा में सिर्फ पढ़ना ही काफी नहीं है, बल्कि बार-बार रिवीजन करना बेहद जरूरी है. उन्होंने बताया कि नीट में समय कम होता है, इसलिए चीजें तुरंत याद आनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि बायोलॉजी के कई चैप्टर उन्होंने 15 से 20 बार तक पढ़े. इसके अलावा फिजिक्स और केमिस्ट्री में ज्यादा से ज्यादा सवाल हल करने पर ध्यान दिया. उनके मुताबिक लगातार प्रैक्टिस करने से परीक्षा में सवाल जल्दी हल करने की क्षमता बढ़ती है.
री-एग्जाम के बाद बढ़ा था दबाव
आर्यन ने बताया कि नीट की दोबारा परीक्षा उनके लिए भी एक चुनौती थी. उन्होंने कहा कि दो साल तक लगातार एक ही लक्ष्य के लिए मेहनत करना आसान नहीं होता. कई बार दोस्तों से मिलना, बाहर जाना और कई दूसरी चीजों को छोड़ना पड़ता है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि सफलता के लिए सबसे जरूरी चीज है कंसिस्टेंसी. उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे मेहनत करना कभी बंद न करें और अपना 100 प्रतिशत दें ताकि बाद में किसी तरह का पछतावा न रहे.
10वीं और 12वीं में भी शानदार प्रदर्शन
आर्यन पढ़ाई में पहले से ही काफी अच्छे रहे हैं. उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जबकि 12वीं साइंस स्ट्रीम में 98.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए. इसके अलावा उन्होंने जेईई मेन में भी 99.699 पर्सेंटाइल हासिल किया था. आर्यन बायोलॉजी ओलंपियाड में भी राज्य स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं.
न्यूरोसर्जन बनना है सपना
नीट में सफलता के बाद आर्यन का लक्ष्य डॉक्टर बनना है. उन्होंने बताया कि वह भविष्य में न्यूरोसर्जन बनना चाहते हैं और मेडिकल क्षेत्र में अपना योगदान देना चाहते हैं.
आर्यन ने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता. अगर छात्र लगातार प्रयास करते रहें और अपनी गलतियों से सीखते रहें तो सफलता जरूर मिलती है. वाराणसी के इस होनहार छात्र की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो नीट जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं. री-एग्जाम के दबाव से निकलकर AIR 7 हासिल करना आर्यन की मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति को दिखाता है.
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