UP Teacher Recruitment 2026: उत्तर प्रदेश में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) राज्य के सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों और स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने की बड़ी तैयारी कर रहा है. आयोग को पिछले 10 दिनों में ही प्रिंसिपल के 211 और असिस्टेंट प्रोफेसर के 2,107 पदों पर भर्ती के लिए प्रस्ताव मिल चुके हैं. आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार के मुताबिक इन खाली पदों की सही और आखिरी संख्या तय होते ही आगामी अगस्त महीने में भर्ती का नया विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा. इसके साथ ही पिछले काफी समय से अटकी हुई पुरानी भर्तियों को भी अगले दो महीनों के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
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पुरानी भर्तियां जल्द होंगी पूरी
आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने बताया कि नई भर्तियों को लेकर रिक्त पदों का विवरण लगातार मिल रहा है. चूंकि एक भर्ती परीक्षा को कराने के लिए आवेदन लेने, प्रश्नपत्र बनाने, उनकी छपाई करने और परीक्षा केंद्र तय करने जैसे कई जरूरी काम होते हैं इसलिए आयोग पूरी तैयारी के साथ ही अगस्त में विज्ञापन जारी करेगा. इसके अलावा आयोग की प्राथमिकता पुरानी अटकी हुई भर्तियों को भी जल्द से जल्द निपटाने की है. पीजीटी (PGT), टीजीटी (TGT) और टीईटी (TET) के माध्यम से होने वाली भर्तियों को आने वाले दो महीनों में पूरा करने की योजना है. आयोग का गठन साल 2023 में इसीलिए किया गया था ताकि माध्यमिक, उच्च शिक्षा और आईटीआई संस्थानों में शिक्षकों व प्राचार्यों की भर्ती पूरी पारदर्शिता के साथ एक ही जगह से की जा सके. पिछले छह महीनों में आयोग ने टीजीटी, पीजीटी, असिस्टेंट प्रोफेसर और टीईटी जैसी चार बड़ी परीक्षाएं कराई हैं, जिनमें से तीन के रिजल्ट भी आ चुके हैं और बाकी काम आखिरी चरण में है.
पेपर लीक रोकने के लिए AI का पहरा और कड़े नियम
भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह सुरक्षित और नकलविहीन बनाने के लिए आयोग शुरुआत से ही तकनीक का सहारा ले रहा है. अभ्यर्थियों के फॉर्म भरने के समय से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स की मदद से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक हाजिरी और डिजिटल तरीकों से पहचान पक्की की जाती है. इसी कड़ाई की वजह से हाल ही में हुई टीईटी परीक्षा में 44 संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया था. इस परीक्षा में करीब 20 लाख अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था और लगभग 88 फीसदी लोग परीक्षा में शामिल हुए थे. परीक्षाओं को ठीक से कराने के लिए आयोग जिला प्रशासन, सरकार और प्रोफेशनल एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है.
अपने जिले में नहीं मिलेगा परीक्षा केंद्र
परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष बनाए रखने के लिए आयोग ने केंद्र आवंटन को लेकर सख्त नियम बनाए हैं. सामान्य अभ्यर्थियों को परीक्षा देने के लिए उनका गृह जनपद (अपना जिला) नहीं दिया जाएगा. उन्हें नजदीकी मंडल या पास के क्षेत्र में सेंटर दिया जाएगा ताकि उन्हें ज्यादा दूर भी न जाना पड़े और परीक्षा भी पारदर्शी तरीके से हो. हालांकि, दिव्यांग अभ्यर्थियों को छूट देते हुए उनके अपने जिले में ही परीक्षा केंद्र की सुविधा दी जाएगी. नियमों को इतना कड़ा किया गया है कि एक ही परिवार या एक ही गांव के लोगों को एक साथ परीक्षा केंद्र पर नहीं बैठाया जाएगा, यहाँ तक कि जुड़वां भाई-बहनों के लिए भी अलग-अलग व्यवस्था की जाएगी. आयोग के अध्यक्ष का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य बिना किसी रुकावट के पूरी तरह मेरिट के आधार पर और बिना किसी गलती के साफ-सुथरी भर्ती प्रक्रिया पूरी करना है.
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