Noida New Expressway: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और जेवर के बीच कनेक्टिविटी को और मजबूत करने के लिए एक नए एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे के निर्माण की तैयारी तेज हो गई है. हाल ही में नोएडा प्राधिकरण के सेक्टर-96 स्थित मुख्य कार्यालय में इस प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्ययोजना रिपोर्ट (DPR) की समीक्षा के लिए अहम बैठक हुई.
ADVERTISEMENT
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), यमुना प्राधिकरण और नेशनल हाई स्पीड रेल कारपोरेशन लिमिटेड जैसे बड़े विभागों के अधिकारी शामिल हुए. नया रूट न केवल भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक के दबाव को कम करेगा, बल्कि दिल्ली-एनसीआर से जेवर एयरपोर्ट जाने वालों का समय भी काफी हद तक बचाएगा.
DND से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेस-वे तक जाएगा रास्ता
NHAI के कंसल्टेंट (एसएमईसी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) ने बैठक में साफ किया कि प्रस्तावित एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे दिल्ली-डीएनडी से शुरू होगा और यमुना पुश्ता के किनारे-किनारे नोएडा व ग्रेटर नोएडा को पार करते हुए सीधे यमुना एक्सप्रेस-वे के चाई-4 (Chai-4) बिंदु से जुड़ जाएगा.
इसका सीधा मतलब यह है कि दिल्ली या नोएडा से जेवर एयरपोर्ट या आगरा की तरफ जाने वाले वाहनों को शहर के भारी ट्रैफिक में फंसने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वे सीधे इस एलिवेटेड रूट को पकड़कर अपनी मंजिल तक पहुंच सकेंगे.
सभी बड़े विभागों ने दी हरी झंडी, DPR का काम तेज
इस प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के लिए सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बिठाना था, जिसमें अब तेजी आती दिख रही है. बैठक में लिए गए अहम फैसले कुछ इस तरह हैं-
- अलाइनमेंट पर बनी सहमति: ग्रेटर नोएडा के क्षेत्र में एक्सप्रेस-वे का रूट ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की सहमति से और यमुना प्राधिकरण के क्षेत्र में उनके अधिकारियों की मंजूरी से तय किया जा रहा है.
- हाई स्पीड रेल की मंजूरी: नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने भी इस रूट पर अपनी सहमति दे दी है, जिससे अब डीपीआर तैयार करने का काम तेजी से आगे बढ़ेगा.
- सिंचाई विभाग का साथ: चूंकि यह एक्सप्रेस-वे यमुना पुश्ता के किनारे से गुजरेगा, इसलिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग को भी इस प्लानिंग में साथ रखा गया है.
क्या बदलेगा इस नए एक्सप्रेस-वे से?
देखा जाए तो नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे पर गाड़ियों का दबाव हर गुजरते दिन के साथ बढ़ता जा रहा है. ऐसे में नया एलिवेटेड एक्सप्रेस-वे आने वाले वक्त के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा. यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के विकास को रफ्तार देने वाला एक नया इकोनॉमिक कॉरिडोर साबित हो सकता है. अब देखना यह है कि कागजों पर तेजी से दौड़ रहा यह प्रोजेक्ट जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी शुरू होता है.
ADVERTISEMENT











