यह कहानी सलीम खान उर्फ सलीम वास्तिक की है, जिसने मार्शल आर्ट्स की दुनिया से निकलकर अपराध के रास्ते पर कदम रखा. शामली जिले का रहने वाला सलीम दिल्ली में मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर के तौर पर काम करता था, लेकिन उसकी महत्वाकांक्षाओं ने उसे एक खौफनाक किडनैपिंग की साजिश का हिस्सा बना दिया.
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मार्शल आर्ट्स इंस्ट्रक्टर से किडनैपर तक का सफर
सलीम खान अपनी शारीरिक दक्षता का इस्तेमाल बच्चों को मार्शल आर्ट्स सिखाने में करता था, लेकिन 1995 में उसने फिरौती के लिए अपहरण का रास्ता चुना. उसने संदीप बंसल नामक बच्चे के अपहरण की साजिश रची और भारी फिरौती की मांग की. इस घटना ने उस वक्त दिल्ली और यूपी पुलिस को हिलाकर रख दिया था.
आतंकवाद विरोधी बयान और दोहरी पहचान
सलीम खान की पहचान केवल एक अपराधी की नहीं थी. वह अक्सर सार्वजनिक मंचों पर आतंकवाद विरोधी बयानों के कारण भी चर्चा में रहता था. उसकी इस दोहरी पहचान ने जांच एजेंसियों को लंबे समय तक उलझाए रखा. पुलिस की गहन पड़ताल के बाद जब आरोप साबित हुए, तब उसकी असलियत दुनिया के सामने आई.
पुलिस की सक्रियता और गिरफ्तारी
किडनैपिंग के बाद सलीम खान को पकड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी. दिल्ली और शामली पुलिस ने कड़ी मेहनत और कई संदिग्धों से पूछताछ के बाद सलीम को दबोच लिया. उसकी गिरफ्तारी से न केवल एक बड़े किडनैपिंग केस का खुलासा हुआ, बल्कि अपराधियों के लिए यह एक कड़ा संदेश भी था.
सलीम खान का यह मामला आज भी अपराध जगत और कानून व्यवस्था के लिए एक चेतावनी की तरह है, जो दिखाता है कि कैसे एक प्रतिष्ठित पेशे की आड़ में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है.
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