आजमगढ़ में 2 पंडितों को मारने वाले अरविंद सिंह पर था 'आत्मा का साया'? भाई की हत्या से क्या है कनेक्शन

संतोष शर्मा

23 Sep 2026 (अपडेटेड: 23 Sep 2026, 01:24 PM)

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में तीन दिनों से चल रहा महामृत्युंजय जाप मंगलवार शाम अचानक खौफनाक वारदात में बदल गया. परिवार के मुताबिक घर में अरविंद सिंह के ऊपर ‘आत्मा के साये’ की आशंका जताई जा रही थी, इसलिए अनुष्ठान कराया जा रहा था. इसी दौरान अरविंद पर पत्नी बबीता सिंह और दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा.

Azamgarh Murder Case

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Azamgarh Murder Case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में के एक घर में चल रहा महामृत्युंजय जाप मंगलवार शाम अचानक खौफनाक वारदात में बदल गया. परिवार के मुताबिक घर में अरविंद सिंह के ऊपर ‘आत्मा के साये’ की आशंका जताई जा रही थी, इसलिए अनुष्ठान कराया जा रहा था. इसी दौरान अरविंद पर पत्नी बबीता सिंह और दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या करने का आरोप लगा. इसके बाद उसने अपने तीन बच्चों को बंधक बना लिया. करीब सात घंटे तक पुलिस ने उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार कार्रवाई के दौरान अरविंद की मौत हो गई. उसके आठ साल के बेटे शौर्य ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया.

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‘आत्मा के साये’ की थी आशंका 

परिवार की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक अरविंद सिंह के लिए ही घर में महामृत्युंजय जाप कराया जा रहा था. उसकी पत्नी बबीता सिंह तीन पुरोहितों के साथ पूजा करवा रही थीं. परिजनों का कहना है कि परिवार में यह धारणा बन गई थी कि अरविंद के ऊपर किसी तरह का ‘साया’ है. इसी आशंका को दूर करने के लिए तीन दिनों से धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था. हालांकि, ‘आत्मा के साये’ से जुड़ी बात परिवार की मान्यता और दावे पर आधारित है. इसी पूजा के दौरान अरविंद की नाराजगी सामने आने और बाद में विवाद बढ़ने की बात बताई जा रही है.

आधार कार्ड मांगने के बाद बढ़ा विवाद

जानकारी के मुताबिक मंगलवार शाम करीब 5:30 बजे अरविंद सिंह घर पहुंचा. उस समय घर में पूजा-पाठ चल रहा था. आरोप है कि उसने वहां मौजूद पुरोहितों से सवाल-जवाब शुरू कर दिए और उनका आधार कार्ड मांगने लगा. इसी दौरान उसकी पत्नी बबीता ने पुरोहितों के साथ हो रहे कथित व्यवहार का विरोध किया. इसके बाद विवाद बढ़ गया और अरविंद ने फायरिंग शुरू कर दी. परिवार के बयान के अनुसार, सबसे पहले बबीता सिंह को गोली मारी गई. वहां मौजूद एक पुरोहित मौके से भाग निकला, जबकि दो अन्य पुरोहितों की भी गोली लगने से मौत हो गई. कुछ ही देर में पूजा वाला घर चीख-पुकार और गोलियों की आवाज से गूंज उठा.

हत्या के बाद बच्चों को बनाया बंधक

तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने तीनों बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया. अरविंद ने कमरे का दरवाजा बंद कर लिया और बच्चों को अपने साथ अंदर रखा. बाहर पुलिस, अधिकारी, रिश्तेदार और ग्रामीण मौजूद थे. पुलिस के सामने आरोपी को पकड़ने के साथ-साथ तीनों बच्चों को सुरक्षित बचाने की चुनौती थी. अरविंद के पास रिवॉल्वर होने की वजह से अधिकारी बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ रहे थे.

7 घंटे तक अरविंद से पुलिस ने की बातचीत

पुलिस ने अरविंद से सरेंडर करने और बच्चों को बाहर भेजने की अपील की. परिवार के लोगों के जरिए भी उसे समझाने की कोशिश की गई. पुलिस के मुताबिक अरविंद बच्चों को अपनी ‘शील्ड’ बताते हुए बाहर आने के लिए तैयार नहीं था. करीब सात घंटे तक अधिकारी बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करते रहे. कोशिश थी कि बिना जल्दबाजी के बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जाए. इस दौरान घर के चारों तरफ पुलिस का घेरा बना रहा. लेकिन लंबे इंतजार के बाद कमरे के अंदर से अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद पुलिस को तत्काल ऑपरेशन शुरू करना पड़ा.

टियर गैस के बाद घर में दाखिल हुई पुलिस

गोली चलने के बाद पुलिस ने स्टन ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद दरवाजा तोड़कर टीम घर के अंदर दाखिल हुई. पुलिस के मुताबिक, अंदर पहुंचते ही अरविंद ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी. उसने लगातार चार से पांच राउंड गोली चलाने की बात सामने आई है. इसके जवाब में पुलिस टीम ने भी फायरिंग की. इस कार्रवाई के दौरान अरविंद घायल हो गया. उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई.

घायल शौर्य की भी इलाज के दौरान मौत

ऑपरेशन के दौरान पुलिस को अरविंद का आठ साल का बेटा शौर्य गोली लगने से घायल मिला. उसे तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज किया गया, लेकिन बाद में उसकी मौत हो गई. वहीं, कमरे में मौजूद दोनों बच्चियों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया. जानकारी के अनुसार लंबे समय तक घर के अंदर बंधक रहने की वजह से दोनों बच्चियों को भूख-प्यास और मानसिक आघात का सामना करना पड़ा. इस घटना में अरविंद, उसकी पत्नी, दो पुरोहितों और उसके बेटे शौर्य समेत कुल पांच लोगों की मौत हो गई.

बड़े भाई की हत्या के बाद बदलने की बात

परिवार के मुताबिक इस घटना की एक कड़ी साल 2018 से जुड़ती है. 12 अक्टूबर 2018 को अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या कर दी गई थी. परिजनों का कहना है कि इस घटना के बाद अरविंद के व्यवहार में काफी बदलाव आया. वह लोगों से कम मिलने-जुलने लगा और अकेला रहने लगा. परिवार के मुताबिक, सुनील सिंह की हत्या का मामला अभी अदालत में चल रहा है. इसके अलावा, साल 2015 में बबीता सिंह ने पड़ोस के दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था. परिवार के अनुसार, इस मामले में दोनों आरोपियों को 20-20 साल की सजा हुई थी. पुराने मामलों और मौजूदा वारदात के बीच सीधा संबंध क्या है, यह जांच का विषय है.

रिवॉल्वर का कनेक्शन भाई से?

इस मामले में इस्तेमाल की गई रिवॉल्वर को लेकर भी परिवार की ओर से जानकारी सामने आई है. परिजनों के मुताबिक यह हथियार अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह का था, जिसे उनकी हत्या के बाद अरविंद को ट्रांसफर किया गया था. इसी रिवॉल्वर से मंगलवार की घटना में कथित तौर पर फायरिंग की गई. हालांकि, हथियार के लाइसेंस, उसके ट्रांसफर और इस्तेमाल से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से होना बाकी है.