भोजपुरी सिनेमा की स्टार अभिनेत्री और सिंगर अक्षरा सिंह आज जिस मुकाम पर हैं वहां तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा है. करियर में आई कई मुश्किलों, विवादों और गहरे डिप्रेशन के दौर से गुजर चुकीं अक्षरा ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में दिल छू लेने वाले खुलासे किए हैं. अक्षरा सिंह ने खुलकर स्वीकार किया कि अगर उनके कठिन समय में माता-पिता का सहारा न मिलता, तो शायद आज वे इस दुनिया में जीवित भी न होतीं.
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''जिस दौर से मैं गुजरी, वहां पेरेंट्स घर से लात मारकर निकाल देते हैं"
इंटरव्यू के दौरान अपने बुरे दौर को याद करते हुए अक्षरा सिंह बेहद भावुक हो गईं. उन्होंने समाज की सोच और परिवार के समर्थन के महत्व पर बात करते हुए कहा ''मैं बहुत लकी हूं कि मेरे माता-पिता ने वैसी परिस्थिति में मेरा साथ दिया. हम जिस परिवेश से आते हैं वहां अक्सर ऐसी बदनामी और विवादों के बाद पेरेंट्स बच्चों को लात मारकर घर से निकाल देते हैं. लेकिन मेरे माता-पिता ने वह साहस दिखाया. जब समाज में तरह-तरह की बातें हो रही थीं और चारों तरफ बदनामी थी तब मेरे पेरेंट्स भी उस जिल्लत से जूझ रहे थे जिसे उन्होंने कभी जाहिर नहीं होने दिया.'
अक्षरा ने बताया कि उनके माता-पिता खुद भी इसी इंडस्ट्री से जुड़े थे. इसलिए खामियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ा. फिर भी उन्होंने कभी बेटी का मनोबल गिरने नहीं दिया.
'क्या तुम मर रही हो? उठो और जीरो से शुरू करो'
अक्षरा सिंह ने बताया कि जब भी उनके मन में टूटने या हार मानने का ख्याल आता था तो उनके पिता और मां ढाल बनकर खड़े हो जाते थे. निराशा के पलों में उनके पिता हमेशा उनका मोराल हाई करते थे और कहते थे 'चलो उठो और काम पर लगो. क्या हो गया? क्या तुम मर रही हो? जाओ, मेहनत करो और फिर से जीरो से शुरुआत करो.' पिता के इन्हीं कड़वे मगर हिम्मत देने वाले शब्दों ने अक्षरा को डिप्रेशन से बाहर निकाला और दोबारा अपनी पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया.
माता-पिता के नाम अक्षरा की खास अपील
अपनी आपबीती शेयर करने के साथ ही अक्षरा सिंह ने सभी माता-पिता और युवाओं के लिए एक खास मैसेज दिया. अक्षरा ने कहा कि जिस दिन माता-पिता 'लोग क्या कहेंगे' की सोच से बाहर निकलकर अपने बच्चों के दोस्त बन जाएंगे, उस दिन उनके बच्चे दुनिया में सबसे कामयाब इंसान बनेंगे. उन्होंने कहा कि आज के दौर में सिर्फ लड़कियां ही नहीं बल्कि लड़के भी अपने दिल की बात माता-पिता से कहने में संकोच करते हैं. शादी और करियर को लेकर युवाओं पर बहुत मानसिक दबाव रहता है, इसलिए परिवारों में संवाद होना बेहद जरूरी है.
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