UP News: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर भदरी रियासत और उसके नरेश उदय प्रताप सिंह चर्चा में हैं. मुहर्रम के दौरान हर साल होने वाले हाउस अरेस्ट विवाद के बीच इस बार भी पुलिस ने उन्हें नजरबंद किया. इसी घटनाक्रम के बाद उनके व्यक्तित्व, जीवनशैली, राजनीतिक रुख और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है. राजा भैया के पिता के रूप में पहचान रखने वाले उदय प्रताप सिंह अपने अलग विचारों और शाही जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं.
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मुहर्रम और हाउस अरेस्ट का विवाद
उदय प्रताप सिंह को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा मुहर्रम के समय होने वाले हाउस अरेस्ट को लेकर होती है. आरोप है कि हर साल मुहर्रम के दौरान उन्हें प्रशासन द्वारा नजरबंद किया जाता है. इस बार भी स्थिति कुछ ऐसी ही रही, जब बड़ी संख्या में पुलिस बल उनके घर पहुंचा और उन्हें घर में ही रोक दिया गया. बताया जाता है कि वह मुहर्रम से जुड़े एक विशेष मार्ग या गेट को लेकर आपत्ति जताते रहे हैं और इसे हटाने की मांग करते हैं.
भदरी रियासत और पारिवारिक पृष्ठभूमि
उदय प्रताप सिंह का संबंध भदरी रियासत से है. उनके चाचा राजा बजरंग बहादुर सिंह कांग्रेस सरकार में राज्यपाल रह चुके हैं और हिमाचल प्रदेश के उपराज्यपाल भी रहे हैं. बाद में उन्होंने उदय प्रताप सिंह को गोद लिया था, जिससे उन्हें भदरी रियासत का उत्तराधिकारी माना गया. उनकी शिक्षा दून स्कूल में हुई और इसके बाद उन्होंने बीएससी और कृषि से जुड़ी पढ़ाई की. आगे की पढ़ाई के लिए वे जापान भी गए, जहां उन्होंने विशेष अध्ययन किया.
काला काकर रियासत से पुराना विवाद और सियासत
भदरी रियासत और काला काकर रियासत के बीच लंबे समय से वर्चस्व की राजनीतिक और ऐतिहासिक टकराव की चर्चा रही है. इस विवाद में काला काकर रियासत की रत्ना सिंह और दिनेश सिंह जैसे राजनीतिक नाम भी जुड़े रहे. इसी दौर में उदय प्रताप सिंह की राजनीतिक सोच और रुख में बदलाव आने की बात कही जाती है, जिसके बाद उनका जुड़ाव विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों से भी जोड़ा जाता रहा है.
इंदिरा गांधी से संबंध और रियासतों का अंत
बताया जाता है कि उदय प्रताप सिंह की मां गिरजा देवी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बीच अच्छे संबंध थे. हालांकि, बाद में रियासतों के भत्ते समाप्त होने के बाद उदय प्रताप सिंह ने इसका विरोध किया था. इसी विरोध के बाद उन्होंने भदरी को स्वतंत्र राज्य घोषित करने की बात भी कही थी, जिसे बाद में दबाव के चलते वापस लिया गया.
राजनीति, मुकदमे और विवादित छवि
उदय प्रताप सिंह पर कई मुकदमों की चर्चा भी होती रही है. कहा जाता है कि उनके खिलाफ 20 लोगों के गैंग का सरगना होने का मामला भी दर्ज हुआ था. हालांकि, उन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा और न ही वोट डाला. उनकी छवि एक ऐसे व्यक्ति की बताई जाती है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था से दूरी रखते हैं, हालांकि इस पर अलग-अलग दावे भी मौजूद हैं.
राजा भैया से संबंध और पारिवारिक विचारधारा
राजा भैया और उनके पिता के संबंध अक्सर चर्चा में रहते हैं. राजा भैया ने कई बार कहा है कि उनके पिता उनसे बहुत औपचारिक संबंध रखते हैं और राजनीतिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करते. यह भी कहा जाता है कि उदय प्रताप सिंह अपने बेटे की राजनीतिक शैली और पढ़ाई-लिखाई को लेकर अलग राय रखते थे, हालांकि राजा भैया इन दावों से सहमत नहीं हैं.
जीवनशैली और राजसी अंदाज
उदय प्रताप सिंह को लेकर यह भी कहा जाता है कि उनकी जीवनशैली आज भी राजसी परंपराओं से जुड़ी हुई है. भदरी रियासत परिसर में वे लोगों से मुलाकात करते हैं, उन्हें जलपान कराते हैं और पारंपरिक तरीके से स्वागत करते हैं. कई बार उन्हें सिगार के साथ कुर्सी पर बैठे हुए भी देखा गया है, जिससे उनकी शाही छवि और मजबूत होती है.
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