Muzaffarnagar News: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र के माड़ी गांव में स्थित एक फैक्ट्री से बंधुआ मजदूरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है. 22 जून को लेबर विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 12 मजदूरों को मुक्त कराया, जिन्हें कथित तौर पर झूठे वादों के आधार पर फंसाकर बंधक बनाकर रखा गया था. इस घटना ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है.
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कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से भागने में सफल हुआ और सीधे पुलिस को सूचना दी. उसकी जानकारी के आधार पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और फैक्ट्री पर छापा मारा. कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री संचालकों को गिरफ्तार किया गया और बंधक बनाए गए मजदूरों को मुक्त कराया गया.
लालच देकर किया गया था शोषण
जांच में सामने आया कि इन मजदूरों को ₹8,000 से ₹10,000 मासिक वेतन, अच्छा खाना और रहने की सुविधा का झांसा देकर विभिन्न राज्यों-उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और नेपाल—से लाया गया था. लेकिन फैक्ट्री में पहुंचने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई और उन्हें बंधक बनाकर रखा गया.
कैद जैसी जिंदगी और अमानवीय व्यवहार
मजदूरों ने बताया कि उन्हें मोबाइल फोन और आधार कार्ड तक से वंचित कर दिया गया था. बाहर निकलने की पूरी तरह मनाही थी और हर समय निगरानी रखी जाती थी. आरोप है कि उनके साथ मारपीट की जाती थी और यहां तक कि निगरानी के लिए फैक्ट्री में खतरनाक पिटबुल कुत्ते भी रखे गए थे, जिससे उनका डर और बढ़ गया.
परिवारों का दर्द और भावुक मुलाकात
मुक्त हुए मजदूरों के परिवार जब मौके पर पहुंचे तो अपने परिजनों की हालत देखकर भावुक हो गए. विशेष रूप से राजस्थान के जोधपुर निवासी 20 वर्षीय विक्रम सिंह के भाई अपने छोटे भाई को देखकर रो पड़े. उन्होंने बताया कि विक्रम चार महीने पहले घर से घूमने जाने की बात कहकर निकला था और उसके बाद लापता हो गया था.
प्रशासन की बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री संचालकों शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार किया है. मौके से मजदूरों को प्रताड़ित करने में इस्तेमाल किए गए सामान भी बरामद किए गए हैं. मामले में गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है और गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा रही है.
आगे की जांच और राहत कार्य
एसएसपी मुजफ्फरनगर के अनुसार, मामले की गहराई से जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है. साथ ही सभी मजदूरों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. प्रशासन द्वारा पुनर्वास योजना के तहत सहायता राशि और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. मजदूरों के बैंक खाते खुलवाने और उनके परिवारों को सुरक्षित घर भेजने की प्रक्रिया भी जारी है.
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