स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ जिन बटुकों ने लगाए आरोप अब उनकी चौंकाने वाली मेडिकल रिपोर्ट आ गई सामने

Swami Avimukteshwaranand Case: प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी भिअमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के मामले में मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में गंभीर संकेत मिलने की बात कही जा रही है. कोर्ट में पेश होने वाली इस रिपोर्ट के बाद केस में बड़ा मोड़ आ सकता है.

यूपी तक

• 03:23 PM • 26 Feb 2026

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Swami Avimukteshwaranand Case: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज नाबालिग बटुकों के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा मोड़ आ गया है. पीड़ित नाबालिगों की मेडिकल रिपोर्ट सामने आ गई है, जिसमें गंभीर तथ्यों का उल्लेख बताया जा रहा है. यह रिपोर्ट गुरुवार को बंद लिफाफे में जांच अधिकारी को सौंपी गई और शुक्रवार को इसे कोर्ट में पेश किया जाना है. रिपोर्ट की सामग्री को लेकर प्रयागराज से लेकर वाराणसी तक हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार, मेडिकल निष्कर्षों ने मामले को और गंभीर बना दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है.

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मेडिकल रिपोर्ट में क्या सामने आया

बता दें कि बुधवार को पुलिस ने पीड़ित नाबालिगों का मेडिकल परीक्षण कराया था. प्रयागराज के एक सरकारी अस्पताल में दो डॉक्टरों के पैनल ने यह जांच की थी. जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई और गुरुवार को इसे सीलबंद लिफाफे में जांच अधिकारी को सौंप दिया गया.

सूत्रों के मुताबिक, मेडिकल एग्जामिनेशन डिटेल में जबरन यौन कृत्य के संकेत दर्ज किए गए हैं. रिपोर्ट में कथित तौर पर यह बताया है कि नाबालिगों के साथ यौन शोषण हुआ है. अगर कोर्ट में भी यही निष्कर्ष सामने आते हैं तो यह केस कानूनी रूप से और मजबूत हो सकता है. माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर पुलिस आगे गिरफ्तारी की दिशा में बढ़ सकती है.

नाबालिगों ने कैमरे पर लगाए थे गंभीर आरोप

मेडिकल रिपोर्ट से पहले नाबालिग बटुकों ने कैमरे पर आकर कई गंभीर आरोप लगाए थे. उन्होंने दावा किया था कि अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद, अरविंद और प्रकाश नाम के व्यक्तियों ने उनके साथ बार-बार यौन शोषण किया. एक बटुक ने कहा कि उन्हें निर्देश दिए जाते थे और रोने पर भी कोई दया नहीं दिखाई जाती थी.

पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि बाहरी लोग भी वहां आते थे और बच्चों को उनके सामने पेश किया जाता था. वाराणसी के जोशी मठ में कथित रूप से यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा. बटुकों का दावा है कि वे करीब दो साल तक उस संस्थान में रहे और कम से कम 20 बच्चों के साथ ऐसा होता देखा. उन्होंने कहा कि माघ मेले के दौरान, मौनी अमावस्या के दिन, मौका मिलने पर वे वहां से निकलकर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के पास पहुंचे और पूरी घटना बताई. 

मामला कैसे पहुंचा कोर्ट तक

विवाद उस समय गहराया जब प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंदके खिलाफ मामला पहुंचा. आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने आरोप लगाया कि स्वामी नाबालिग बच्चों का शोषण करते हैं और वे फर्जी शंकराचार्य हैं. उन्होंने दावा किया कि 18 जनवरी को नाबालिग उनके पास आए और अपनी आपबीती सुनाई. 

आशुतोष ब्रह्मचारी के अनुसार, उन्होंने पहले थाने में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने अदालत का रुख किया. 20 तारीख को सुनवाई के बाद 21 तारीख को कोर्ट ने झूसी पुलिस को अभिमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. इसके बाद झूसी थाने में स्वामी, उनके शिष्य और दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. एफआईआर के बाद पुलिस ने जांच शुरू की साक्ष्य जुटाए और नाबालिगों का मेडिकल परीक्षण कराया. पुलिस टीम वाराणसी भी पहुंची और संबंधित स्थानों से सबूत एकत्र किए.

साजिश बनाम शोषण का दावा

जहां एक ओर मेडिकल रिपोर्ट के हवाले से शोषण की पुष्टि की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद लगातार आरोपों को साजिश बता रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें राजनीतिक और प्रशासनिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है. उन्होंने पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और सत्ता तंत्र की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. दोनों पक्षों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. अब सबकी नजर कोर्ट में पेश होने वाली मेडिकल रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है.

अगर रिपोर्ट में दर्ज तथ्यों को अदालत स्वीकार करती है तो मामले में गिरफ्तारी और आगे की कठोर कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल यह मामला धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है.

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