Shankaracharya Mukteshwaranand Case: प्रयागराज और वाराणसी से जुड़ा एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला इन दिनों सुर्खियों में है. ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद पर नाबालिग बटुकों के यौन शोषण के आरोप लगे हैं. पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है. एक ओर शंकराचार्य इसे साजिश करार दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष लगातार गंभीर आरोप सामने रख रहा है. इस पूरे विवाद के बीच कैमरे पर आए एक बटुक के बयान ने मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है.
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मामला क्या है और कैसे शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद माघ मेले के दौरान 18 जनवरी को हुई एक घटना के बाद तेज हुआ. उस दिन पुलिस और बटुकों के बीच कथित मारपीट और झड़प की घटना सामने आई, जिसके बाद शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद पर सवाल उठने लगे. इसी बीच आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज सामने आए और उन्होंने दावा किया कि दो नाबालिग बटुकों ने उनके सामने अपने साथ हुई घिनौनी हरकतों का खुलासा किया है.
आशुतोष ब्रह्मचारी के अनुसार, वे प्रयागराज के झूसी थाने गए और इन बटुकों के मामले में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई. इसके बाद उन्होंने पॉक्सो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट में 18 जनवरी की घटना और बटुकों के आरोपों का जिक्र किया गया. 20 तारीख को सुनवाई के बाद मामला सुरक्षित रख लिया गया और 21 फरवरी को कोर्ट ने झूसी पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. इसके बाद पॉक्सो एक्ट के तहत शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.
बटुक का सनसनीखेज दावा
यूपी Tak से बातचीत में एक बटुक ने जो आरोप लगाए, वे बेहद गंभीर हैं. बटुक का दावा है कि वह अध्ययन के लिए शंकराचार्य के पास गया था लेकिन गुरु दीक्षा के नाम पर उसके साथ गलत काम किया गया. उसके मुताबिक अभिमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद और उनके साथ जुड़े दो अन्य लो, अरविंद और प्रकाशमिलकर बच्चों का शोषण करते थे.
बटुक ने बताया कि ये चारों लोग बिहार, राजस्थान जैसे राज्यों से बच्चों को लाते थे और उनके साथ यौन शोषण करते थे. उसने आरोप लगाया कि वाराणसी और जोशीमठ सहित कई स्थानों पर यह सिलसिला चलता रहा. उसका दावा है कि माघ मेले के दौरान भी 16 तारीख को उसके साथ शोषण किया गया था.
वीआईपी के सामने पेश किए जाने का आरोप
बटुक ने यह भी आरोप लगाया कि बनारस के जोशीमठ और काशी के विद्या मठ में बड़े-बड़े वीआईपी सफेद कपड़ों में आते थे. उनके सामने छोटे छात्रों को पेश किया जाता था. उसने कहा कि वह उन वीआईपी लोगों को पहचान सकता है अगर वे सामने आएं. बटुक के अनुसार, मुकुंदानंद, अरविंद और अन्य लोग इन बच्चों को तथाकथित सेवा के नाम पर वीआईपी के सामने भेजते थे.
डर और धमकी का माहौल
जब बटुक से पूछा गया कि उसने पहले आवाज क्यों नहीं उठाई तो उसने दावा किया कि मुकुंदानंद उसे धमकाते थे कि अगर उसने बाहर किसी को बताया तो उसके साथ अच्छा नहीं होगा. डर और धमकी के कारण उसने अपने माता-पिता को भी कुछ नहीं बताया. उसका कहना है कि करीब दो साल से वह उस विद्यालय में रह रहा था और कम से कम 20 बच्चों के साथ ऐसा होता देखा गया.
उसने बताया कि सबसे पहले उसने यह बात आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज को बताई, क्योंकि उसे लगा कि वही उसकी मदद करेंगे. आशुतोष ब्रह्मचारी ने सहयोग का आश्वासन दिया, जिसके बाद मामला आगे बढ़ा.
पुलिस जांच और ताजा अपडेट
बता दें कि कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज पुलिस ने मामला दर्ज किया और वाराणसी जाकर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू की. पुलिस ने बटुकों के बयान दर्ज कर लिए हैं. ताजा जानकारी के मुताबिक एक नाबालिग का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.
साजिश का आरोप और पुलिस पर सवाल
दूसरी ओर शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को साजिश बताया है. उन्होंने प्रयागराज के एक पुलिस अधिकारी आईपीएस अजय पाल शर्मा की तस्वीर आशुतोष ब्रह्मचारी के साथ दिखाते हुए दावा किया कि पुलिस भी इस साजिश में शामिल है. उन्होंने यूपी पुलिस की जांच पर भरोसा न जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
इस पूरे मामले ने धार्मिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली, नाबालिग छात्रों की सुरक्षा और प्रशासन की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर गंभीर आरोप हैं, दूसरी ओर साजिश के दावे. फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और अदालत की निगरानी में आगे की कार्रवाई हो रही है. बटुकों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन आरोपों में कितना सच है और कितनी साजिश . तब तक यह मामला सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है.
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