Sudha Sharma Interview: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नाम की खूब चर्चा हो रही है और वो है नवीन शर्मा, जिन्हें छात्र प्यार से 'नवीन सर' कहते हैं. एक शिक्षक के रूप में लाखों युवाओं का भविष्य संवारने के बाद अब नवीन सर ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है. 22 फरवरी को जब अखिलेश यादव के बगल में बैठकर उन्होंने सदस्यता ली तो सोशल मीडिया पर हलचल मच गई. अखिलेश यादव के साथ उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. लेकिन एक सफल शिक्षक और अब नेता बनने के इस सफर के पीछे का संघर्ष क्या रहा? बुलंदशहर के मसौता गांव में उनके घर पहुंचकर यूपी तक ने उनकी माता जी, सुधा शर्मा से खास बातचीत की. आइए जानते हैं उनकी मां ने उनके बारे में क्या कुछ कहा.
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बचपन में थे शरारती
आज जिन नवीन शर्मा को छात्र अनुशासन और मेहनत की मिसाल मानते हैं, उनका बचपन भी आम बच्चों की तरह शरारतों से भरा रहा है. उनकी माताजी सुधा शर्मा ने मुस्कुराते हुए एक पुराना किस्सा साझा किया जो आज भी परिवार में याद किया जाता है. उन्होंने बताया कि जब नवीन सातवीं-आठवीं कक्षा में पढ़ते थे, तब एक दिन उन्होंने अपने पिता की जेब से ₹50 निकाल लिए. उस समय शायद उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह छोटी सी हरकत कितना बड़ा सबक बन जाएगी.
पिता को जब पैसों के गायब होने का पता चला तो शक सीधे नवीन पर गया, क्योंकि घर में वही ऐसी शैतानियों के लिए मशहूर थे. उनकी माताजी ने बताया कि उनके पिता अनुशासन के मामले में बेहद सख्त थे. जैसे ही उन्हें यकीन हुआ कि पैसे नवीन ने ही लिए हैं उन्होंने डंडे से अच्छी-खासी पिटाई कर दी. यहां तक कि अगर कभी पैंट उल्टी टंगी मिलती या जेब में गड़बड़ी दिखती तो पिता को लगता कि यह काम भी नवीन का ही होगा. उस दिन की डांट और सख्ती ने नवीन को जिम्मेदारी और ईमानदारी का ऐसा सबक दिया, जिसे उन्होंने जिंदगी भर याद रखा.
नींद भगाने का अनोखा तरीका
नवीन शर्मा की कामयाबी के पीछे जहां उनकी मेहनत है, वहीं एक किसान पिता का सख्त अनुशासन भी उतना ही बड़ा कारण रहा है. उनकी माताजी बताती हैं कि घर में पढ़ाई को लेकर बिल्कुल समझौता नहीं होता था. पिता का साफ नियम था कि रात 10 बजे से पहले सोना नहीं है और सुबह 4 बजे हर हाल में उठकर पढ़ाई करनी है. चाहे सर्दी हो या गर्मी, यह नियम कभी नहीं टूटता था.
ठंड के दिनों में जब नवीन रजाई ओढ़कर पढ़ते-पढ़ते सोने लगते तो पिता उन्हें रेलिंग पर बैठकर पढ़ने को कहते थे. उनका तर्क सीधा था कि अगर नींद आएगी तो गिरने का डर रहेगा और बच्चा जागता रहेगा. इतना ही नहीं, पिता कई-कई बार सीढ़ियां चढ़कर यह देखने आते कि बच्चे सच में पढ़ रहे हैं या चोरी-छिपे सो गए. यह सख्ती उस समय भले ही कठिन लगती रही हो लेकिन इसी अनुशासन ने नवीन के अंदर मेहनत और जिम्मेदारी की आदत मजबूत कर दी.
किसान के बेटे का ‘अखिलेश यादव’ के बगल तक का सफर
एक छोटे किसान परिवार से निकलकर राजनीति के मंच तक पहुंचना आसान नहीं होता. सीमित जमीन, पांच बच्चों की जिम्मेदारी और संसाधनों की कमी के बीच नवीन शर्मा ने अपनी राह खुद बनाई. उनकी माताजी बताती हैं कि परिवार ने संघर्ष के दौर में भी बच्चों की पढ़ाई को सबसे ऊपर रखा. आज जब वही बेटा मेहनत के दम पर पहचान बना चुका है तो परिवार के लिए यह गर्व का क्षण है.
भावुक होकर उन्होंने कहा कि जिस दिन उन्होंने अपने बेटे को अखिलेश यादव के बगल में बैठे देखा, वह पल जिंदगी भर नहीं भूलेंगी. उनके शब्दों में, “हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हमारा बेटा इतनी ऊंचाई तक पहुंचेगा. उसे उस मुकाम पर देखकर लगा कि उसकी सारी मेहनत रंग लाई.” उस समय नवीन के पिता अस्पताल में भर्ती थे क्योंकि उन्हें अटैक आया था लेकिन बेटे की इस उपलब्धि की खबर ने उन्हें भी गर्व और सुकून का एहसास कराया.
क्या ‘डिजिटल गुरु’ की फैन-फॉलोइंग वोट में बदलेगी?
नवीन शर्मा को एक शिक्षक के रूप में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लाखों छात्र फॉलो करते हैं. यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह लोकप्रियता 2027 के चुनाव में वोटों में बदल पाएगी? इस पर उनकी माताजी का भरोसा बिल्कुल डगमगाता नहीं दिखता. उनका कहना है कि युवाओं का प्यार और विश्वास ही नवीन की सबसे बड़ी ताकत है. जो छात्र उनसे पढ़े हैं, वे केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि मैदान में भी साथ खड़े होंगे.
उनकी माताजी का मानना है कि नवीन से पढ़ाई कर चुके छात्र न सिर्फ खुद समर्थन देंगे, बल्कि अपने माता-पिता और परिवार को भी उनके पक्ष में जोड़ेंगे. जहां तक टिकट का सवाल है, यह फैसला समाजवादी पार्टी नेतृत्व के हाथ में है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि बेटे की लोकप्रियता और युवाओं के बीच उसकी पकड़ को देखते हुए पार्टी जरूर अवसर देगी. उनका विश्वास है कि शिक्षा के माध्यम से जो भरोसा बना है, वही राजनीति में भी समर्थन में बदल सकता है.
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