उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह और भाजपा मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच का रिश्ता चर्चा का विषय बना हुआ है. यह चर्चा तब शुरू हुई जब उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी हुई और दिनेश प्रताप सिंह उनके समर्थन में खड़े नजर आए.
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क्या है दोनों के बीच का रिश्ता?
दिनेश प्रताप सिंह और उमाशंकर सिंह एक-दूसरे के समधी हैं. उमाशंकर सिंह के बेटे प्रिंस युवकेश सिंह का विवाह दिनेश प्रताप सिंह के भतीजे (छोटे भाई बृजेश सिंह की बेटी) कनिका सिंह से फरवरी 2024 में हुआ था. इस शादी की खास बात यह थी कि बसपा सुप्रीमो मायावती खुद बलिया जाकर दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने पहुंची थीं, जबकि वे आमतौर पर ऐसी शादियों में नहीं जातीं. उमाशंकर सिंह को मायावती अपना 'मुंह बोला भाई' भी मानती हैं.
आयकर विभाग की छापेमारी और विवाद
उमाशंकर सिंह की कंस्ट्रक्शन कंपनी 'छात्र शक्ति' और उनके लखनऊ व बलिया स्थित ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापा मारा. यह जांच पिछले 11 महीनों से कैग (CAG) की रिपोर्ट के आधार पर चल रही थी. छापेमारी पर भाजपा मंत्री ने इसे 'अमानवीय' बताया. उन्होंने खुलासा किया कि उमाशंकर सिंह पिछले दो वर्षों से चौथे स्टेज के ब्रेन कैंसर से जूझ रहे हैं और उनका इलाज अमेरिका, दिल्ली और लखनऊ में चल रहा है. उन्होंने कहा कि ऐसी गंभीर बीमारी की स्थिति में छापेमारी करना और डॉक्टरों को घर न जाने देना गलत है.
इस बात से समझिए उमाशंकर सिंह का राजनीतिक कद
2022 के चुनावों में जब बसपा पूरी तरह सिमट गई, तब भी उमाशंकर सिंह बलिया की रसड़ा सीट से चुनाव जीतकर आए. वे 2012 और 2017 में भी यहीं से विधायक रहे हैं. राजनीति में आने से पहले वे पीडब्ल्यूडी (PWD) के बड़े ठेकेदार थे. उनकी कंपनी 'छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन' का मायावती के शासनकाल में लखनऊ के पार्कों के निर्माण में बड़ा योगदान रहा है.
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