Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े कथित चंदा घोटाले का मामला एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में आ गया है. SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद आखिरकार FIR दर्ज कर ली गई है, लेकिन इसके बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है. FIR में कुछ नाम शामिल किए जाने और कुछ बड़े नामों को बाहर रखने को लेकर विपक्ष ने सरकार और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
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FIR दर्ज होने के बाद शुरू हुआ नया विवाद
लंबे समय से उठ रहे सवालों के बाद अब इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है. यह FIR ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है. कुल आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है, जिसमें अधिकतर चंदा गिनती करने वाले कर्मचारी और कैशियर शामिल हैं. आरोप है कि राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती और धन प्रबंधन में अनियमितताएं हुईं. हालांकि, सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि ट्रस्ट के किसी भी बड़े पदाधिकारी का नाम FIR में शामिल नहीं किया गया है.
किन लोगों के नाम FIR में शामिल हैं
FIR में जिन आठ लोगों के नाम दर्ज हैं, उनमें छह लोग चढ़ावे की गिनती से जुड़े कर्मचारी बताए जा रहे हैं. इनमें टिन्नू यादव (चंपत राय के ड्राइवर), अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, मनीष यादव (टिन्नू यादव का भतीजा), लवकुश मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं. इसके साथ ही इन पर गैर-जमानती धाराएं भी लगाई गई हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है.
बड़े नामों की अनुपस्थिति पर सवाल
विवाद तब और बढ़ गया जब यह सामने आया कि FIR में राम मंदिर ट्रस्ट के किसी भी वरिष्ठ सदस्य का नाम नहीं है. ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे नामों को FIR से बाहर रखा गया है. इसी वजह से विपक्ष का आरोप है कि कार्रवाई अधूरी और पक्षपातपूर्ण है. विपक्ष का कहना है कि “बड़ी मछलियों को बचाकर छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है.”
विपक्ष का हमला और राजनीतिक बयानबाजी
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस FIR और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है. वहीं आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी SIT के सामने पेश होकर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि बड़े घोटाले को दबाने के लिए कर्मचारियों पर FIR दर्ज कर ध्यान भटकाया जा रहा है. संजय सिंह ने यह भी दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच होती तो सैकड़ों करोड़ के जमीन घोटाले में बड़े लोगों पर भी कार्रवाई होती.
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
विपक्ष का आरोप है कि जांच प्रक्रिया पहले से तय दिशा में आगे बढ़ रही है और निष्कर्ष पहले ही निकाल लिए गए थे. उनका दावा है कि SIT रिपोर्ट के आधार पर केवल चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई की गई है. इस पूरे मामले ने जांच की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
राजनीतिक माहौल और आगे की स्थिति
इस विवाद के बीच राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है. विपक्ष एकजुट होकर सरकार पर हमलावर है और इसे धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक रंग देने का आरोप लगा रहा है. वहीं आने वाले दिनों में इस मामले के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है क्योंकि कई बड़े राजनीतिक नेता इस पर बयान दे रहे हैं और अयोध्या में हलचल बढ़ रही है.
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