यूपी में स्कूल चलो अभियान का आगाज, सीएम योगी की अधिकारियों से अपील– जहां आप तैनात, वहीं पढ़ाएं अपने बच्चे

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में स्कूल चलो अभियान शुरू किया. सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए अधिकारियों से अपने बच्चों को वहीं पढ़ाने की अपील. कन्या सुमंगला योजना से 25 लाख बेटियों को लाभ.

यूपी तक

• 03:10 PM • 05 Apr 2026

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूल चलो अभियान के जरिए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन का खाका पेश किया है. मुख्यमंत्री ने इस बार एक बेहद प्रभावी संदेश देते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे अपने बच्चों का दाखिला उन्हीं सरकारी स्कूलों में कराएं जहां वे खुद कार्यरत हैं. सरकार का मानना है कि इस पहल से स्कूलों में 'स्वस्थ प्रतिस्पर्धा' पैदा होगी और पठन-पठन के स्तर में बड़ा सुधार आएगा.

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सरकारी स्कूलों की बदलती सूरत: 'निपुण' विद्यार्थियों का सम्मान

अभियान के दौरान मुख्यमंत्री ने 'निपुण' घोषित किए गए विद्यालयों और मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया. सरकार का लक्ष्य सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को निजी स्कूलों से बेहतर बनाना है. इस कड़ी में चित्रकूट के जिलाधिकारी (DM) का उदाहरण पेश किया गया, जिन्होंने सरकारी स्कूल में बच्चों का दाखिला कराकर समाज में एक बड़ा संदेश दिया है. शासन का मानना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी खुद आगे आएंगे, तभी आम जनता का भरोसा सरकारी तंत्र पर बढ़ेगा.

'कन्या सुमंगला योजना': बेटियों की पढ़ाई का सरकार उठाएगी जिम्मा

  • शिक्षा के साथ-साथ बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार 'मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना' को तेजी से आगे बढ़ा रही है.
  • आर्थिक सुरक्षा: इस योजना के तहत बेटी के जन्म से लेकर उसकी उच्च शिक्षा तक अलग-अलग चरणों में आर्थिक सहायता दी जाती है.
  • बड़ा लाभार्थी वर्ग: वर्तमान में प्रदेश की 25 लाख से अधिक बेटियां इस योजना का लाभ उठा रही हैं. यह पहल न केवल बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोक रही है, बल्कि बेटियों की अनिवार्य शिक्षा भी सुनिश्चित कर रही है.

भविष्य की बुनियाद: बेहतर अवसर और मजबूत बुनियादी ढांचा

'स्कूल चलो अभियान' केवल एक वार्षिक उत्सव नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों के सुदृढ़ीकरण का एक मिशन है. ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए स्कूलों की बिल्डिंग, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं को पहले ही सुधारा जा चुका है. अब सरकार का पूरा ध्यान डिजिटल लर्निंग और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर है, ताकि गांव के गरीब बच्चे भी भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें.